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सोमवार, 26 सितंबर 2022

सितंबर 26, 2022

सीएम गहलोत ने तो खेल दिया अपना कार्ड, अब सचिन पायलट के दांव की बारी! कांग्रेस आलाकमान के लिए इधर कुआं उधर खाई?

सीएम गहलोत ने तो खेल दिया अपना कार्ड, अब सचिन पायलट के दांव की बारी! कांग्रेस आलाकमान के लिए इधर कुआं उधर खाई?



जयपुर। नाटकीय घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के रुख ने हाईकमान को भी चौंका दिया है। संकट सुलझने की बजाय उलझता ही जा रहा है। अब जो राजनीतिक चक्रव्यू बना है उस से निकलना गहलोत और पायलट दोनों के लिए नामुमकिन है। वही आलाकमान के लिए स्थिति यह हो गई है कि इधर कुआं है तो उधर खाई है। दिल्ली से जयपुर आए कांग्रेस पर्यवेक्षकों अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़के साथ सीएम गहलोत और विधायकों के बीच बातचीत में सहमति नहीं बनी। आलाकमान के आदेश पर आज सुबह दोनों दिल्ली लौट गए हैं।

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गहलोत के वफादार माने जाने वाले विधायकों ने अपने इस्तीफे रविवार रात विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी को सौंप दिए। राज्य विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने रविवार देर कहा कि हमने इस्तीफे दे दिए हैं और आगे क्या करना है इसका फैसला अब विधानसभा अध्यक्ष करेंगे। इससे पहले राज्य के आपदा प्रबंधन एवं राहत मंत्री गोविंद राम मेघवाल ने मीडियाकर्मियों से कहा कि हम अभी अपना इस्तीफा देकर आए हैं।

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कांग्रेस के मुख्य सचेतक जोशी ने कहा कि हमने अपनी बात आलाकमान तक पहुंचा दी है। उम्मीद करते हैं कि आने वाले जो फैसले होंगे उनमें उन बातों का ध्यान रखा जाएगा। विधायक चाहते हैं कि जो कांग्रेस अध्यक्ष और आलाकमान के प्रति निष्ठावान रहे हैं उनका पार्टी पूरा ध्यान रखे। राजधानी जयपुर में यह सारा घटनाक्रम कांग्रेस के विधायक दल की बैठक में गहलोत का उत्तराधिकारी चुनने की संभावनाओं के बीच हुआ। इस स्थिति से मुख्यमंत्री और सचिन पायलट के बीच सत्ता को लेकर संघर्ष गहराने का संकेत मिल रहा है। गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे, इसलिए उनका उत्तराधिकारी चुने जाने की चर्चा है।

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महेश जोशी ने कहा कि अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पर हर विधायक का भरोसा है। हमने अपनी बात रखी है और उम्मीद है कि आलाकमान द्वारा अंतिम निर्णय लेने पर हमारी मांगों पर विचार किया जाएगा। हम चाहते हैं कि पार्टी उन लोगों का ख्याल रखे जो कांग्रेस के प्रति वफादार रहे हैं।


अजय माकन के साथ बातचीत के लिए प्रताप सिंह खाचरियावास, शांति धारीवाल, महेश जोशी, संयम लोढ़ा का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था, लेकिन सहमति नहीं बनी। विधायकों ने 19 अक्तूबर तक पार्टी की सभी बैठकों के बहिष्कार का एलान किया। विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने अजय माकन के सामने तीन मांगें रखी थीं-


1. 102 विधायकों में से ही चुना जाए मुख्यमंत्री

2.  सचिन पायलट कबूल नहीं

3.  मुख्यमंत्री का चेहरा गहलोत तय करें


वहीं, अजय माकन ने कहा कि हम एक ही एजेंडा लेकर आए है, हमने जो तय कर लिया वो फाइनल है। विधायकों ने स्पष्ट किया कि 19 अक्तूबर तक कोई बैठक नहीं होगी और कोई बातचीत नहीं होगी। 19 अक्तूबर के बाद सभी विधायकों की दिल्ली जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात करने की योजना।


इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उस होटल में गए थे जहां दिल्ली से आए पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे तथा अजय माकन रुके थे। वहां इन नेताओं के बीच लंबी बैठक हुई। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भी मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। कुछ और विधायक भी विधायक दल की प्रस्तावित बैठक में भाग लेने पहुंचे लेकिन यह बैठक अंतत: नहीं हुई।


राज्य की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 108 विधायक हैं। पार्टी को 13 निर्दलीय उम्मीदवारों का भी समर्थन प्राप्त है। गहलोत के वफादार माने जाने वाले कुछ विधायकों ने परोक्ष रूप से पायलट का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का उत्तराधिकारी कोई ऐसा होना चाहिए, जिन्होंने 2020 में राजनीतिक संकट के दौरान सरकार को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, न कि कोई ऐसा जो इसे गिराने के प्रयास में शामिल था।


तो क्या पायलट गिरा सकते हैं गहलोत सरकार?

अब संभावना यह है बन रही है कि गहलोत के दबाव में आलाकमान सचिन पायलट को दरकिनार कर सकता है। ऐसी स्थिति में पायलट के लिए स्थिति विकट हो जाएगी या तो अपने समर्थकों सहित विधानसभा से इस्तीफा देकर सरकार गिरा दे या फिर चुपचाप आगामी चुनाव का इंतजार करें..

मंगलवार, 13 सितंबर 2022

सितंबर 13, 2022

कारों में छह एयरबैग के चक्कर में नितिन गडकरी ने अक्षय कुमार से करवाया ऐसा विज्ञापन कि हो गए ट्रोल!

कारों में छह एयरबैग के चक्कर में नितिन गडकरी ने अक्षय कुमार से करवाया ऐसा विज्ञापन कि हो गए ट्रोल!



नई दिल्ली. टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री की कार दुर्घटना में मौत के बाद कारों में 6 एयर बैग लगाने की चर्चा चल रही है. इसी को लेकर अभिनेता अक्षय कुमार ने हाल ही में सड़क सुरक्षा अभियान और रोड एक्सीडेंट से बचने के लिए एक विज्ञापन में काम किया। इस वीडियो को सड़क परिवहन और राजमार्ग के सहयोग से बनाया गया है। इस वीडियो को शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर शेयर भी किया है।

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 वीडियो में कारों में छह एयरबैग को बढ़ावा दिया गया है। हालांकि विज्ञापन का कॉनसेप्ट लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। सड़क सुरक्षा अभियान वाले इस वीडियो की सोशल मीडिया पर आलोचना की गई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इस विज्ञापन के लिए सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस विज्ञापन की आलोचना की है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि विज्ञापन दहेज की प्रथा को बढ़ावा दे रहा है, जो देश में एक दंडनीय अपराध है। 



वीडियो में एक पिता को दुल्हन की विदाई पर रोते हुए देखा जा सकता है। और एक पुलिस वाले का करिदार निभा रहे अक्षय कुमार दुल्हन के पिता को नवविवाहित जोड़े को सिर्फ दो एयरबैग वाली कार में भेजने के लिए ताना मारते हैं। विज्ञापन को समस्याग्रस्त बताते हुए, शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने हैरानी जताई है कि ऐसे क्रिएटिव कौन पास करता है, ऐसे कैसे कोई बना सकता है...जो दहेज की बुराई और आपराधिक कृत्य को बढ़ावा देते हैं।

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प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, यह एक ऐसा समस्याग्रस्त विज्ञापन है। ऐसे क्रिएटिव कौन पास करता है? क्या सरकार कार के सुरक्षा पहलू को बढ़ावा देने के लिए पैसा खर्च कर रही है या इस विज्ञापन के माध्यम से दहेज की बुराई और आपराधिक कृत्य को बढ़ावा दे रही है? तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने कहा कि, यह भारत सरकार को आधिकारिक तौर पर दहेज को बढ़ावा देने के लिए देखना है। 

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सड़क सुरक्षा विज्ञापन भारतीय समूह टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री की रविवार को एक कार दुर्घटना में मृत्यु के बाद शुरू किया गया था, साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि कार दुर्घटना दोषपूर्ण सड़क डिजाइन के कारण हुई और सरकार छह एयरबैग के लिए दबाव डालकर सड़कों को ठीक करने के बजाय जिम्मेदारी से ध्यान हटा रही थी।


एक अन्य यूजर ने लिखा, यह विज्ञापन गड्ढा है। पूरी तरह से प्लॉट खो दिया। क्या यह शादी के बारे में है, दुल्हन के बारे में है, या दहेज के बारे में, या फिर 6 एयरबैग कार के लिए? ये सरकारी विज्ञापन इतने बचकाने और गलत कल्पना कैसे कर सकते हैं। वे सुरक्षा के बारे में किसी अन्य तरीके से बात नहीं कर सकते थे।' एक अन्य ने लिखा, केवल भारत में ही सरकार करदाताओं का पैसा एक दंडनीय अपराध, दहेज को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन अभियान बनाने के लिए खर्च करेगी। ऐसा सिर्फ यहां ही हो सकता है।''


इससे पहले शुक्रवार को, नितिन गडकरी ने अक्षय कुमार को राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान में उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, "सड़क सुरक्षा के मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के उनके प्रयास वास्तव में सराहनीय हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, हम जागरूकता और जनभागीदारी से भारत में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. यह करके रहेंगे. सरकार इस क्षेत्र में सुधार के लिए लगातार काम कर रही है.

रविवार, 4 सितंबर 2022

सितंबर 04, 2022

Congress President. सीएम गहलोत नहीं बनेंगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राहुल गांधी ही संभालेंगे बागडोर? संकेत है कि चुनाव लड़ेंगे राहुल! जानिए क्या आया ट्विस्ट?

Congress President. सीएम गहलोत नहीं बनेंगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राहुल गांधी ही संभालेंगे बागडोर? संकेत है कि चुनाव लड़ेंगे राहुल! जानिए क्या आया ट्विस्ट?



मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे लोगों को बड़ा झटका. कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष भी गांधी परिवार से ही होगा. राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव लड़ने की जिद छोड़ चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, पार्टी के कई नेताओं ने दावा किया है कि राहुल गांधी अक्टूबर में होने वाले चुनाव लडेंगें। नेताओं ने विश्वास जताया है कि राहुल गांधी उनकी बात जरुर मानेंगे। 

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राहुल गांधी विदेश यात्रा से भारत लौट चुके हैं और पार्टी नेता उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश कांग्रेस नेताओं की ओर से जारी है. गौरतलब है कि हर बार कांग्रेस संगठन के चुनाव से पूर्व बाहरी अध्यक्ष बनाने का माहौल तैयार होता है, उसके बाद यह पद गांधी परिवार तक ही सीमित रह जाता है.



2019 में हुए लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि गांधी परिवार से कोई भी पार्टी का नेतृत्व नहीं करेगा। ‘राहुल गांधी बात नही मोडेंगें’ एक और जहां पार्टी में इस बात को लेकर चर्चा है कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद नहीं संभालेंगे, वहीं उनके एक करीबी सूत्र ने इसे पूरी तरह से खारिज करने से इनकार कर दिया है। “उन्हें मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं क्योंकि पार्टी के लिए यही एकमात्र अच्छा समाधान है।

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उनकी सहमति से इंकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि रविवार को महंगाई के खिलाफ दिल्ली की रैली और फिर भारत जोड़ी यात्रा कैसी होती है। इससे पहले राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, जो अध्यक्ष पद के लिए गांधी परिवार के अलावा एक विकल्प हैं, मल्लिकार्जुन खड़गे और सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि राहुल को मनाने की कोशिश आखिरी वक्त तक जारी रहेगी।


अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष के चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है, कांग्रेस वर्किंग कमिटी द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, 22 सितंबर को चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होगी और 17 अक्टूबर को चुनाव होगा, अगर मतदान कराने की नौबत आई तो 19 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।

राजस्थान पर असर-

सीएम गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने पर सर्वाधिक प्रभाव सचिन पायलट के गुट पर पड़ेगा, पिछले दिनों हो रही चर्चा के बाद यह गुट सक्रिय हुआ था और गहलोत गुट के भी कई विधायक पायलट की तरफ नरमी जता रहे थे. इस संबंध में सचिन पायलट ने भी आलाकमान का आदेश मानने संबंधित कई तरह के बयान दिए थे. दूसरी ओर स्वयं अशोक गहलोत का मूड राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का कतई नहीं रहा है.

बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

फ़रवरी 02, 2022

सत्ता के विरोध में भाजपा और कांग्रेस उतरी सड़क पर..भाजपा ने राज्य सरकार को तो कांग्रेस ने केंद्र सरकार को कोसा.. जानिए दिलचस्प प्रदर्शन पर कैसा रहा आलाप अपना अपना?

सत्ता के विरोध में भाजपा और कांग्रेस उतरी सड़क पर..भाजपा ने राज्य सरकार को तो कांग्रेस ने केंद्र सरकार को कोसा.. जानिए दिलचस्प प्रदर्शन पर कैसा रहा आलाप अपना अपना?

कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते भाजपाई।


नागौर। REET पेपर लीक और धांधली, बीजेपी युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं पर पुलिस लाठीचार्ज और हिरासत के खिलाफ नागौर बीजेपी ने कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया.  राज्यपाल के नाम का ज्ञापन कलक्ट्रेर को सौपा. नागौर शहर मंडल कें कार्यकर्ताओं ने विधायक मोहन राम चौधरी के नेतृत्व में निंदा कर कड़ा विरोध जताया है. 

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जिलाध्यक्ष एवं नागौर विधायक मोहन राम चौधरी ने कहा कि राजस्थान सरकार ने दमनकारी नीति अपनाते हुए पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज किया. जिसमें कई कार्यकर्ताओं को गंभीर चोटें आई हैं और महिला कार्यकर्ताओं पर भी पुलिस ने लाठीचार्ज किया. 



कांग्रेस सरकार राजस्थान के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और अपने चहेते नेताओं का बचाव कर रही है. REET पेपर लीक मामले का तार राजीव गांधी स्टडी सर्किल से जुड़ने के बाद बीजेपी इस मुद्दे पर आक्रामक हो गई है. बीजेपी की मांग है कि सीबीआई से मामले की जांच करवाई जाए.

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 मंगलवार को REET पेपर लीक मामले की CBI जांच की मांग करते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां के नेतृत्व में युवा मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष हिमांशु शर्मा और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच कर रहे थे इस दौरान पुलिस ने मोर्चा कार्यकर्ताओं को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और लाठीचार्ज किया। घटना में 35 से ज्यादा बीजेपी कार्यकर्ताओं को चोटें आईं और 3 गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.

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उधर महंगाई के खिलाफ सड़क पर उतरी नागौर जिला काग्रेस. सचिव मोती लाल यूथ काग्रेस के जिलाध्यक्ष हनुमान बांगडा के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन.

कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते कांग्रेसी।


जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस को लेकर एक विदेशी मीडिया के ताजा खुलासे के बाद भारत में सियासी पारा बढ़ गया है। कांग्रेस ने एक बाद फिर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला शुरू कर दिया है। इसी बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष  बीवी श्रीनिवास के निर्देश पर नागौर जिला काग्रेस के पदाधिकरियो ने  सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। 

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पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर मामले पर खुलासे के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हनुमान बांगडा के नेतृत्व मे नागौर कलक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन किया सचिव मोती लाल का कहना है कि बढती महगाई से आम जनता परेशान है।

सोमवार, 26 जुलाई 2021

जुलाई 26, 2021

..तो क्या एक वायरल वीडियो ने पूर्व मंत्री हबीबुर्रहमान की बेटी को बासनी सरपंच चुनाव में हरा दिया! देखें वीडियो जिसमें महिलाएं सुना रही है खरी-खोटी..

..तो क्या एक वायरल वीडियो ने पूर्व मंत्री हबीबुर्रहमान की बेटी को बासनी सरपंच चुनाव में हरा दिया! देखें वीडियो जिसमें महिलाएं सुना रही है खरी-खोटी..



नागौर। एक बार राज्य मंत्री और पांच बार विधायक रह चुके हबीबुर्रहमान अशरफी लांबा की बेटी शाहीन सरपंच उपचुनाव में हार गई। उपचुनाव में वोटिंग के दौरान 20767 में से 9590 वोट ही पड़े। पूर्व मंत्री की बेटी अपने ही गढ़ में मात्र 20% वोट ही ले सकी। जबकि उनके प्रतिद्वंदी पूर्व उप जिला प्रमुख चांदबीबी 6656 वोट हासिल कर 4696 वोटों के बड़े अंतर से जीत गई। 



पूर्व सरपंच व विधानसभा प्रत्याशी रहे शौकत अली की पुत्रवधू शबनम बानो को मात्र 906 वोट ही मिले और वह तीसरे स्थान पर रही। चुनाव में पूर्व मंत्री ने अपनी बेटी को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा था। यह चुनाव हबीबुर्रहमान की प्रतिष्ठा का सवाल भी था।



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इन सब में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि पूर्व मंत्री अपनी ही बेटी को अपने ही गांव में आखिर कैसे जीता नहीं पाए?


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1. बासनी में पहली बार 46.18% वोट डाले गए। बासनी के इतिहास में पहली बार इतना कम वोट प्रतिशत हुआ है। क्या जो वोट नहीं पडे वे हबीबुर्रहमान के पक्ष वाले थे? लोग परिवारवाद के खिलाफ हो गए या स्थानीय मुद्दे हावी रहे।


2. उपचुनाव प्रचार के दौरान पूर्व विधायक व मंत्री रह चुके हबीबुर्रहमान का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें पूर्व मंत्री एक गली में बेटी के लिए वोट मांगते हुए विकास करवाने की बात कर रहे हैं। इस दौरान आसपास की महिलाओं ने पानी का मुद्दा उठाया और बोल रही है कि पानी तो आवे ही कोनी, महीना दो महीना आता नहीं है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पानी की कमी का स्थानीय मुद्दा बन जाने से क्या लोगों ने पानी के लिए वोट नहीं दिया?


गौरतलब है कि जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सही बात 1 महीने तक पानी की आपूर्ति नहीं होती है। लोगों का आरोप है कि इस मामले में स्थानीय लाइन में भी अपनी मनमानी करते हैं। अपनी पसंद की गली मोहल्ले या कॉलोनी में मन मर्जी हो तब सप्लाई दे देते हैं। इस संबंध में कई बार शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हो पाया।

गुरुवार, 8 जुलाई 2021

जुलाई 08, 2021

नागौर में भी बैलगाड़ी का जमाना दोहराया, आंदोलनकारी बोले- पेट्रोलियम पदार्थ के दाम ऐसे ही बढे तो यही चलाने होंगे..

नागौर में भी बैलगाड़ी का जमाना दोहराया, आंदोलनकारी बोले- पेट्रोलियम पदार्थ के दाम ऐसे ही बढे तो यही चलाने होंगे..



नागौर। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर आज भारतीय किसान यूनियन ने जिला मुख्यालय नागौर में आज बैल गाड़ी पर गैस की टँकी व मोटरसाइकिल रखकर प्रदर्शन करते हुए रैली निकालकर महंगाई के विरुद्ध व न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने व तीनो काले कानून वापिस लेने का ज्ञापन राष्ट्रपति महोदय के नाम का ज्ञापन अतिरिक्त जिला कलेक्टर नागौर मनोज कुमार को दिया। 


    संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक मेहराम नगवाडिया  ने सभी किसानों का आभार प्रकट किया तथा सरकार को चेतावनी दी कि काले कानून जल्द से जल्द वापस ले नहीं तो सरकार को इंजाम भुगतना पड़ेगा। किसान नेता अर्जुनराम  लोमरोड ने बताया कि  आज पूरे देश में पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस की कीमतें अनियंत्रित तरीके से बढ़ रही है। भारत में आज डीजल की कीमत लगभग ₹100 प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत ₹110 रुपये प्रति लीटर है। वही रसोई गैस की कीमतें पिछले 4 वर्षों में लगभग दोगुनी से भी अधिक होकर लगभग ₹850 प्रति सिलेंडर के हो गई है।


 सरकार ने कोरोना महामारी के दौर में चुपके से रसोई गैस पर दी जा रही आम नागरिक की सब्सिडी को भी समाप्त कर दिया है। लोमरोड़ ने बताया आम नागरिकों द्वारा भुगतान किए जा रहे ईंधन की कीमतों का 70% कर के रूप में सरकार को जाता है। भारत में ईंधन की कीमतें अभी श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे हमारे पड़ोसी देशों सहित अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक हैं। सच्चाई यह है कि विमानन ईंधन उससे ईंधन से सस्ता है जिसका उपयोग किसानों जैसे आम उपभोक्ता करता है। नागरिक इस बोझ को सहन करना जारी नहीं रख सकते हैं और इस संदर्भ में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।


     मेहराम धोलिया जिला अध्यक्ष, इंटक ने बताया कि मोदी जी द्वारा किए गये वादों की आज बीजेपी सरकार खुद ही धज्जियां उड़ा रही हैं। वही पवन काला  रोटरी क्लब ने किसान और मजदूर को अपने हक के लिए लड़ने की बात कही। जेठाराम  बागड़िया जिले के किसानों से अपने अधिकार और हक की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। पूर्व प्रधान भेराराम  धुंधवाल (जिलाध्यक्ष, जाट महासभा) ने किसानों की लड़ाई को लंबा लड़ने की बात कही। 


युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष सहदेव कसवा ने युवाओं को जागरूक करने तथा संगठन को मजबूत करने की बात बताई। युवा नेता रामप्रसाद रोल ने आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में तथा नागौर जिले के समस्त टोल प्लाजा को बंद करने संबंधित जानकारी दी।, फरीद खा दायमा ने किसान, मजदूर के बारे में अपने विचार व्यक्त किये। सोहन खिलेरी, ओमप्रकाश मेघवाल ने केंद्र सरकार कृषि कानून वापिस लेने की बात कही। प्रेमसुख जाजड़ा ने मोदी सरकार की जमकर आलोचना की।


    किसानों ने नागौर कलेक्ट्रेट के सामने एकत्रित हुए तथा मुख्य मार्ग से होते हुए रेल स्टेशन चौराहे तक नारे लगाते हुए रैली निकाली। सभा में जाट महासभा के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामकरण डूकिया, पाबूराम बेनीवाल,(महामंत्री इंटक), सीताराम तांडी, अर्जुन प्रजापत,चंदाराम सियाग, रणजीत धौलिया (अध्यक्ष पूर्व छात्र संघ), नारायण बरनगांव, हरदेव गारू, तेजाराम गोरचिया, सरपंच ओमप्रकाश मेघवाल, दुलाराम बेनीवाल, मंगलाराम, पूर्व पार्षद हरीराम जाखड़, शिक्षक संघ शेखावत उपशाखा अध्यक्ष हरजीत काला आदि मौजूद रहे।

बुधवार, 30 जून 2021

जून 30, 2021

ओवैसी और राजभर का अनोखा फार्मूला.. उत्तर प्रदेश में पांच मुख्यमंत्री और 20 उपमुख्यमंत्री!.. जानिए कैसे संभव होगा यह फॉर्मूला?

ओवैसी और राजभर का अनोखा फार्मूला.. उत्तर प्रदेश में पांच मुख्यमंत्री और 20 उपमुख्यमंत्री!.. जानिए कैसे संभव होगा यह फॉर्मूला?



उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां अपने अपनी गोटियां सेट करने में लग गई है। भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए विपक्षी पार्टियों को किसी भी गठबंधन से परहेज नहीं है। 2017 के चुनाव में मात्र 38 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी Aimim इस बार 200 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। सत्ता हासिल करने के लिए इस बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के साथ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ गठबंधन किया है।


गठबंधन के साथ दोनों पार्टियों में एक फार्मूला तैयार किया है जिसके तहत सत्ता में आने पर वह 5 साल में 5 मुख्यमंत्री बनाएंगे। 1 साल मुस्लिम दूसरे साल कुशवाह तीसरे साल चौहान चौथे साल दलित पांचवे साल ब्राह्मण जाति से मुख्यमंत्री बनाएंगे। इसके साथ ही हर साल चार उपमुख्यमंत्री भी बनाए जाएंगे। यानी 5 साल में 20 उप मुख्यमंत्री बनेंगे।


इससे पूर्व Aimim अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन कल इस दावे को खारिज कर दिया। ओवैसी ने 2 दिन पहले दावा किया था कि उनकी पार्टी राजभर द्वारा गठित 'भागीदारी मोर्चा' के तहत इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राजभर ने कहा, ‘AIMIM के साथ सीट बंटवारे की अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। भागीदारी मोर्चा आने वाले दिनों में इस पर चर्चा करेगा और यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी से मुकाबला करने की उनकी तैयारियों का आकलन करेगा।


राजभर ने कहा कि AIMIM नेतृत्व ने केवल 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन सीट बंटवारे के फार्मूले को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। SBSP प्रमुख ने कहा कि उनके नेतृत्व में गठित मोर्चा अगले साल होने वाले राज्य चुनावों में सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘लेकिन इसके लिए भागीदारों को उच्च-दांव वाले राजनीतिक मुकाबले के लिए अपने संगठनात्मक रैंक को मजबूत करने की जरूरत है। यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है और हम किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं कर सकते।’ 


राजभर AIMIM, कृष्णा पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल और पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के नेतृत्व वाले जन अधिकार मंच सहित बीजेपी के विभिन्न राजनीतिक विरोधियों तक पहुंच रहे हैं, ताकि एक राजनीतिक मोर्चा बनाया जा सके जो संभावित रूप से एक राजनीतिक ताकत के रूप में उभर सके। राजभर ने हाल के महीनों में आम आदमी पार्टी के साथ भी कई बैठकें की हैं, हालांकि दोनों पक्षों ने गठबंधन की कोई पुष्टि नहीं की है।

 AIMIM गत चुनाव में 38 सीटों पर लड़ी थी..

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 38 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली एआईएमआईएम एक भी सीट नहीं जीत सकी थी और मात्र 0.2 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने में सफल रही। दूसरी ओर, एसबीएसपी ने आठ सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन किया था। राजभर के दबदबे वाले राजनीतिक संगठन ने 0.7 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करते हुए चार सीटें जीतीं, जो एआईएमआईएम की तुलना में काफी अधिक थी।

शुक्रवार, 25 जून 2021

जून 25, 2021

ट्विटर की दादागिरी.. देश के आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का अकाउंट किया ब्लॉक..

ट्विटर की दादागिरी.. देश के आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का अकाउंट किया ब्लॉक..




भारत सरकार द्वारा आईटी नियमों में सख्ती का को देखते हुए ट्विटर भी अब मनमानी पर उतर आया है। शुक्रवार को दादागिरी दिखाते हुए बिना चेतावनी के देश के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का टि्वटर अकाउंट ब्लॉक कर दिया। ट्विटर ने आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद को अपना अकाउंट ऑपरेट करने से रोक दिया। कॉपीराइट ऐक्ट का बहाना बनाकर ट्विटर ने आज सुबह रविशंकर प्रसाद को अपने अकाउंट में लॉगइन करने से रोक दिया। प्रसाद अपने एक इंटरव्यू का हिस्सा शेयर करना चाह रहे थे। बाद में ट्विटर ने चेतावनी देते हुए रविशंकर प्रसाद के अकाउंट को फिर से खोल दिया। इसकी जानकारी उन्होंने 'कू' पर दी है।


आईटी मंत्री ने सोशल मीडिया वेबसाइट कू पर लिखा कि उनका अकाउंट करीब एक घंटे तक ब्लॉक रहा। प्रसाद ने कहा कि ट्विटर के इस कदम से यह पता चलता है कि वे अपना एजेंडा चलाने के लिए मनमाने करना चाह रहे हैं। जैसा कि वे दावा करते हैं, उसकी सारी रूचि अपना अजेंडा चलाने में है। ट्विटर के इस कदम के बाद यह तो तय है कि ट्विटर, सरकार और सोशल मीडिया वेबसाइट में टकराव और बढ़ सकता है।


इस संबंध में ट्विटर का कहना था कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संयुक्त राज्य अमेरिका के डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन किया जिसकी वजह से उनके अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया। 


अपना अकाउंट ब्लॉक किए जाने पर प्रसाद ने ट्विटर पर लिखा, 'मित्रों! आज कुछ बहुत ही अनोखी बात हुई। ट्विटर ने कथित तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट के उल्लंघन के चलते लगभग एक घंटे तक मुझे अकाउंट को एक्सेस नहीं दिया और बाद में इसे एक्सेस करने की इजाजत दे दी।

शनिवार, 19 जून 2021

जून 19, 2021

राजस्थान में गहलोत और वसुंधरा के 22 साल पुराने गठजोड़ से जनता आहत.. जानिए सांसद बेनीवाल ने क्यों लगाए हैं यह गंभीर आरोप..

राजस्थान में गहलोत और वसुंधरा के 22 साल पुराने गठजोड़ से जनता आहत.. जानिए सांसद बेनीवाल ने क्यों लगाए हैं यह गंभीर आरोप..





राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान में वर्तमान राजनैतिक हालतों पर बयान देते हुए कहा कि इस कारण राज्य की कानून व्यवस्था आईसीयू में आ गई है और अपराध चरम पर है।  बेनीवाल ने कहा कि राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रभावित हुई भर्तियों को लेकर आंदोलित है और विगत 22 सालो से चला आ रहा गहलोत-वसुंधरा गठजोड़ साफ-साफ झलक रहा है।


 एक तरफ जहां वसुंधरा अपने पक्ष में उन नेताओं से बयान दिलवा रही है जो वसुंधरा के शासन में आकंठ भ्र्ष्टाचार में डूबे हुए थे वही सीएम गहलोत उनकी जी-हुजूरी करने वाले नेताओं से स्वयं के पक्ष में बयान दिलवाने में व्यस्त हैं। सांसद ने कहा कि कोरोना काल से प्रभावित हुए लोगों के लिए केंद्र व राज्य सरकार के पैकेज केवल अखबारों के बयानों तक सीमित नजर आ रहे हैं और राजस्थान में ऐसा दौर पहले कभी नही आया जब विधायक सीएम को धमका रहे हैं और खुद की जैबे भरने में व्यस्त है।


 बेनीवाल ने भाजपा व कांग्रेस दोनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री व भाजपा के नेता बयानों में व्यस्त रहे और ऑक्सीजन की कमी व ब्लैक फंगस के कारण राज्य में मौतें होती रही और राजस्थान के भाजपा के सांसद गण भी केंद्र में राज्य के लिए प्रभावी पैरोकारी करने में नाकाम नजर आये और इन सब कारणों से जो हालत बने उसमे भाजपा व कांग्रेस दोनों जिम्मेदार है। 


बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान में भाजपा के नेताओं पर भी भ्र्ष्टाचार के आरोप आये दिन लग रहे हैं और ऑडियो व वीडियो सामने आ रहे हैं और धरातल पर भी भाजपा राजस्थान में विपक्ष की भूमिका निभाने में नाकाम नजर आ रही है।राजस्थान में गहलोत ही कांग्रेस है और वसुंधरा ही भाजपा है। केवल इस जाप के साथ अधिकतर नेता अपना समय व्यतीत कर रहे हैं जिन्हें जनता के हितों के साथ कोई सरोकार नही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सम्पूर्ण वैक्सीनेशन के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बड़ा जन आंदोलन करेगी।

शनिवार, 12 जून 2021

जून 12, 2021

“सो जा बेटा गब्बर आ जाएगा” की तर्ज़ पर क्या कांग्रेस अपने ही विधायकों को फोन टैपिंग के हव्वे से डरा रही है? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का ट्वीट कुछ इस ओर ही इशारा कर रहा है!

“सो जा बेटा गब्बर आ जाएगा” की तर्ज़ पर क्या कांग्रेस अपने ही विधायकों को फोन टैपिंग के हव्वे से डरा रही है? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का ट्वीट कुछ इस ओर ही इशारा कर रहा है!



प्रदेश में एक बार फिर फोन टेपिंग को लेकर शिकायतों का दौर शुरू हो गया है। शनिवार को कई विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को फोन टैपिंग संबंधित शिकायत दर्ज कराई है। विधायकों द्वारा फोन टैपिंग होने की आशंका जाहिर करने से एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में गर्माहट आ गई है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की ओर से एक बार फिर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया  ट्वीट कर पूरे प्रसंग पर एक बार फिर चुटकी ली है।


पुनिया ने ट्वीट में लिखा- कई विधायक कहते हैं कि उनके फोन टेप हो रहे हैं, जासूसी किए जाने की भी बातें आ रही हैं।


आज फिर से कांग्रेस के एक विधायक कह रहे हैं कि “कई विधायक कहते हैं कि उनके फ़ोन टेप हो रहे हैं,जासूसी हो रही है” कांग्रेस बताए कि ये विधायक कौन हैं? 


“सो जा बेटा गब्बर आ जाएगा” की तर्ज़ पर कांग्रेस अपने ही विधायकों को डरा रही है। कांग्रेस बताए गब्बर कब आएगा?


गौरतलब है कि प्रदेश की गहलोत सरकार की ओर से फोन टैपिंग का मामला गत वर्ष काफी उछला था। बीजेपी इस पर आक्रामक रूख बनाया था। राजस्थान विधानसभा में भी इस फोन टैपिंग के मामले में वबाल मचा था। बीजेपी की ओर से विधायक राजेंद्र राठौड़ और कालीचरण सराफ ने फोन टैपिंग का स्थगन प्रस्ताव लगाया था। इसे मामले को लेकर सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सदन में आवाज उठाई। 


उन्होंने स्पीकर से रूबरू होते हुए कहा कि फोन टैपिंग का मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि मुख्य सचेतक ने इसी मामले को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। एक बार फिर विधायकों द्वारा यही आशंका दौरा या जाने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का दौरे पर फिर गति पकड़ेगा। सूत्र मान रहे हैं कि फोन टैपिंग मामले को लेकर बड़े स्तर पर राजनीतिक उथल-पुथल मचेगी।

शनिवार, 5 जून 2021

जून 05, 2021

सट्टा कारोबार में नागौर कोतवाल व अन्य पुलिस कार्मिको की संलिप्तता के प्रकरण में एसपी की भूमिका भी संदिग्ध- बेनीवाल

सट्टा कारोबार में नागौर कोतवाल व अन्य पुलिस कार्मिको की संलिप्तता के प्रकरण में एसपी की भूमिका भी संदिग्ध- बेनीवाल



एसपी की भूमिका की जांच एडीजी रैंक के अधिकारी से करवाने की सीएम से मांग




नागौर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र प्रेषित करके नागौर जिला पुलिस अधीक्षक की शिकायत करते हुए उनके विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए। सांसद ने अपने पत्र में सीएम गहलोत से कहा कि नागौर जिले में कार्यरत वर्तमान पुलिस अधीक्षक की लच्चर कार्यशैली व कमजोर कानून व्यवस्था के कारण जिले में अपराध बढ़ रहे है। 


उन्होंने कहा कि हाल ही में नागौर जिले में पनप रहे सट्टा कारोबार में नागौर कोतवाल व अन्य पुलिस कार्मिको की संलिप्तता के कारण उन्हें निलंबित किया गया था परन्तु उक्त प्रकरण में एसपी की भूमिका की भी जांच एडीजी रैंक के अधिकारी से करवाना अत्यंत जरूरी है क्योंकि जिस प्रकार सट्टे का कारोबार जिले में पनप गया है उसमें एसपी की संलिप्तता से इनकार नही किया जा,उन्होंने कहा कि नागौर एसपी ऑफिस परिसर में हुई चोरी, जायल क्षेत्र के तरनाऊ में हुई बैंक डकैती सहित अनेक ऐसे प्रकरण है जिनके खुलासे पुलिस आज तक नही कर पाई और हाल ही में खींवसर थाना क्षेत्र में दर्ज सामूहिक बलात्कार व विगत दिनों परबतसर थाने में दर्ज सामूहिक बलात्कार सहित जिले में वर्तमान एसपी के कार्यकाल में महिला अपराध से सम्बन्धित दर्जनों मामलो में एसपी का न तो पीड़ित पक्ष के साथ रवैया सही रहा न ही मामलो में त्वरिता से कार्यवाही की गई।


 वहीं हरियाणा निर्मित अवैध शराब का परिवहन,मादक पदार्थो की बढ़ती तस्करी व भूमाफियाओं के साथ पुलिस सिस्टम में बैठे लोगों की मिलीभगत से पुलिस की कार्यशैली पर आम जन सवालिया निशान खड़ा कर रहा है,उन्होंने सीएम से कहा कि आप एक तरफ तो भ्र्ष्टाचार व अपराध के मामलों में जीरो टॉलरेंस की बात करते है वहीं दूसरी तरफ राज्य के एक दर्जन जिलों मर कार्यरत एसपी भ्र्ष्टाचार की जड़े पनपाने में लगे हुए है और सिरोही एसपी की करतुते जगजाहिर भी हुई।


 उन्होंने तत्काल प्रभाव से नागौर एसपी को हटाने की भी मांग की गौरतलब है कि शुक्रवार को सांसद हनुमान बेनीवाल ने एसपी के विरुद्ध उक्त मामलों को लेकर राज्य के पुलिस महानिदेशक एम एल लाठर से भी मुलाकात की थी !

शुक्रवार, 10 मई 2019

मई 10, 2019

दुष्कर्म प्रकरण में खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल का बडा बयान....

प्रदेश के बहुचर्चित थानागाजी दुष्कर्म प्रकरण में खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल का बडा बयान....




 राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और खिवसर विधायक हनुमान बेनीवाल ने अलवर में नवनियुक्त एसपी परिस देशमुख  की नियुक्ति को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। खींवसर विधायक बेनीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जिस पुलिस अधिकारी से प्रताडि़त होकर नागौर पुलिस में कार्यरत दलित पुलिस कर्मी गेनाराम मेघवाल ने अपने परिजनों के साथ सामूहिक आत्म हत्या कर ली थी।


ऐसे व्यक्ति को फिर से दलित हितों का पहरेदार बनाकर अलवर भेजा गया है। क्या सरकार का यही न्याय है। बेनीवाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सवाल किया है कि क्या यही न्याय है गहलोत जी। जिस पुलिस अधीक्षक से प्रताडि़त होकर नागौर जिले में दलित पुलिस कार्मिक गेनाराम परिवार के साथ सामूहिक आत्महत्या कर ली। जिसको जांच अधिकारी आईजी बीएल मीणा ने संदिग्ध माना था। उसी परिस देशमुख को अलवर में दलित हितों की रक्षा के लिए पोस्टिंग दी गई है।आखिर सरकार की ऐसी क्या मजबूरी रही। 

बुधवार, 10 अप्रैल 2019

अप्रैल 10, 2019

अरे यह क्या हो गया - हनुमान बेनीवाल की पार्टी का सिंबल बोतल भी ईवीएम में नहीं होगा? जानिए आखिर ऐसा क्या हो गया कि बेनीवाल को बोतल की जगह टायर का सिंबल लेना होगा.

अरे यह क्या हो गया - हनुमान बेनीवाल की पार्टी का सिंबल बोतल भी ईवीएम में नहीं होगा? जानिए आखिर ऐसा क्या हो गया कि बेनीवाल को बोतल की जगह टायर का सिंबल लेना होगा.



 भाजपा और आरएलपी ने गठबन्धन के बाद हनुमान बेनीवाल को नागौर से एनडीए के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतारकर नागौर लोकसभा सीट को प्रदेश की हॉट सीटों में से एक बना दिया है । लेकिन इस चुनाव में हनुमान  बेनीवाल का चुनाव चिन्ह  क्या होगा इसको लेकर निर्वाचन आयोग का रुख स्पष्ट हो चुका है।  हम आपको बता देते है कि इस बार नागौर लोकसभा चुनाव में ईवीएम में मतदाताओं को भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल का निशान देखने को नही मिलेगा क्योंकि भाजपा ने गठबन्धन के वायदे के मुताबिक नागौर सीट आरएलपी के लिए छोड़ दी है। तो फिर सवाल ये है कि क्या बेनीवाल का एनडीए के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव चिन्ह उनकी पार्टी का जो सिम्बल है 'बोतल' , वो होगा ।
जी ,नही ,  राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का  सिंबल,  बोतल भी  लोकसभा चुनाव में  हनुमान बेनीवाल की पहचान नहीं होगा।



 इसकी वजह भी हम आपको बता देते है । दरअसल मुख्य निर्वाचन आयोग ने आरएलपी को चुनाव चिन्ह टायर रिकमंडेड किया है।


चुनाव आयोग से मिले पत्र के अनुसार आरएलपी का  चुनाव चिन्ह बोतल नहीं होने से यह साफ हो गया है कि नागौर लोकसभा क्षेत्र के मतदाता को भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल का फूल व आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल ईवीएम पर नहीं मिलेगा। और एनडीए को सपोर्ट करने वाले मतदाताओं को किसी तीसरे चिन्ह पर ही वोट करना होगा।


जानकारी  के मुताबिक  भारतीय जनता पार्टी ने आरएलपी के साथ सीटों का समझौता करते हुए नागौर लोकसभा क्षेत्र की सीट आरएलपी को दी है। सभी अब तक मानकर चल रहे थे कि आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल ही ईवीएम पर रहेगा। लेकिन आज जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश कुमार यादव को निर्वाचन आयोग की ओर से मिले पत्र के अनुसार चुनाव चिन्ह बोतल आरएलपी को आवंटित नहीं की जा सकती है। राष्ट्रीय पार्टियों की श्रेणी में यह चुनाव चिन्ह बोतल तेलंगाना की एक क्षेत्रीय पार्टी को पूर्व में ही आवंटित की जा चुकी है।


आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने अपने चुनावी सिंबल के लिए 25 दिन पूर्व ही आवेदन किया है जबकि नियमानुसार निर्वाचन आयोग को 2 माह पूर्व सिंबल रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होता है। जिला निर्वाचन अधिकारी को मिले पत्र के अनुसार आरएलपी के लिए चुनावी सिंपल टायर रिजर्व में रखा गया है। अगर हनुमान बेनीवाल आरएलपी से ही चुनाव लड़ते हैं तो यह पक्का है कि बोतल की जगह अब ईवीएम में  उनके नाम के आगे टायर का निशान होगा। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल रजिस्टर्ड हुआ था। उसी के आधार पर चुनाव लड़ते हुए आरएलपी ने विधानसभा चुनाव में तीन सीटें जीती थी। आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध हो गया था। ऐसे में लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव चिन्ह बदल जाने से काफी दिक्कत आ सकती है। चुनाव में 'बोतल' सिम्बल नही मिल पाने की बात खुद हनुमान बेनीवाल भी कबूल कर चुके है
जानकार सूत्रों के अनुसार आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल बोतल चुनाव चिन्ह  नहीं मिलने से पेशो- पेश की स्थिति में फंस गए हैं। अगर चुनाव चिन्ह टायर मिलता है तो एक बार फिर सब कुछ नए सिरे से तैयार करना होगा।
अप्रैल 10, 2019

नागौर संसदीय क्षेत्र से कॉमेडियन मंघाराम ओड़िट ठोकेंगें ताल! सबसे बड़ी घोषणा करने का किया दावे का वीडियो हुआ वायरल,, देखें आखिर क्या है सबसे बड़ी घोषणा?

नागौर संसदीय क्षेत्र से कॉमेडियन मंघाराम ओड़िट ठोकेंगें ताल! सबसे बड़ी घोषणा करने का किया दावे का वीडियो हुआ वायरल,, देखें आखिर क्या है सबसे बड़ी घोषणा?



एक रुपया भी नही करेंगे खर्चा क्यो की उनके पास नही है पेसा,



नेता ढोंग करते है मैं किसान, गरीब और आम आदमी हूं।

वोट घर पर नही रखना है सबसे वोट देने की अपील,

मंघाराम का वीडियो इन दिनों मचा रहा है धूम,

मंघाराम है जिले के प्रसिद्ध कॉमेडियन।


 प्रदेश में लोकसभा का सियासी पारा इन दिनों चढ़ता जा रहा है और दोनो बड़े दलों के प्रत्याशी इन दिनों अपने अपने संसदीय क्षेत्रो में चुनाव को लेकर तैयारियां में जुट चुके है और अपना अपना प्रचार प्रसार कर रहे है पार्टियो ने अपने अपने स्टार प्रचारकों की सूचियां भी जारी कर दी है और प्रचार अभियान भी शुरू होने वाला है। तो दूसरी और निर्दलीय प्रत्याशी भी लोकसभा चुनाव को लेकर कमर कस चुके है और मैदान में मोर्चा संभाल चुके है। लेकिन नागौर में इन दिनों एक भावी निर्दलीय प्रत्याशी ने जिले में सभी नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है।



नागौर संसदीय क्षेत्र से मंघाराम ओड़िट ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। मंघाराम की घोषणा ने जिलेभर में धूम मचा रखी है जी हां कहने सुनने में भले ही सियासी दौर में मंघाराम का वीडियो केवल आम आदमी के मनोरंजन के लिहाज से बनाया गया है मगर मंघाराम ने अपने वीडियो से सियासी नेताओ की नब्ज़ देखकर अपना कॉमेडी वीडियो जारी किया गया है जी हां मंघाराम नागौर जिले के प्रसिद्ध कॉमेडियन है और यूट्यूब पर इन की कॉमेडी का हर कोई दीवाना है ।



मंघाराम का लोकसभा में ताल ठोकने का वीडियो भी इन दिनों जिले में धूम मचा रहा है। मंघाराम अपने इस वीडियो के माध्यम से बताते है कि सबसे बड़ी घोषणा करने वाले को जनता वोट देती है मेरी घोषणा सबसे बड़ी होगी। ओड़िट बताते है कि नेताओ को झूठा ढोंग करना पड़ता है। और कोई गरीब के यहां खाना खाता है गरीब बनता है तो कोई आम आदमी बनता है लेकिन में तो गरीब हु आम आदमी ही हु।



आगे कहते है नेता समय समय पर जनेऊ धारण करना हो या टोपी लगाने के साथ तिलक लगाने का नाटक करते है। ओड़िट यही नही रुकते चुनाव में होने वाले भारी भरकम ख़र्च पर कहते है लोग मेरे से सवाल करते है चुनाव में पैसा कहा से खर्च करोगे मेरे पास तो पैसा है नही तो खर्च कहां से करूंगा। इशारों इशारों में यही भी नसीहत वोटरों को दे रहे है कि मेरे पास खिलाने पिलाने के लिए कुछ नही है।  इस दौरान मंघाराम लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए भी अपील करते है और कहते है वोट घर पर नही रखना है सबको अपना मत दान जरूर करना है।



मंघाराम का यह वीडियो भले ही कॉमेडी हो मगर दो तरफा सिख दे रहा है नेताओ के झूठे वादे और ढकोसलो कि और चुनाव में फिजूलखर्ची के साथ साथ ज्यादा से ज्यादा मतदान करने के लिए अपील फर्स्ट इंडिया न्यूज भी अपने दर्शकों से अपील करता है कि लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान करे ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और सही नेता चुनकर संसद तक जाए। 

सोमवार, 8 अप्रैल 2019

अप्रैल 08, 2019

हनुमान बेनीवाल का नागौर जिले में रोड शो जारी जगह-जगह स्वागत, भाजपाइयों ने बिछाए पलक पावडे

हनुमान बेनीवाल का नागौर जिले में रोड शो जारी जगह-जगह स्वागत, भाजपाइयों ने बिछाए पलक पावडे

 

5 साल तक  जिले में नहीं आने पर कांग्रेसी उम्मीदवार ज्योति मिर्धा पर कसा तंज, कहा किसान का बेटा ऐसे लोगों को ससुराल भेजेगा


नागौर जिले में आज सेकड़ो गाड़ियों का काफिला, उत्साह से लबरेज हजारों लोग स्वागत में खड़े आये नजर आए, मौका था , नागौर लोकसभा क्षेत्र से एनडीए के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल का उम्मीदवार घोषित होने के बाद पहली बार लोकसभा क्षेत्र के दौरे का । जयपुर से नावां होते हुए हनुमान बेनीवाल  सेकड़ो गाड़ियों के लश्कर के साथ बेनीवाल ने नागौर लोकसभा क्षेत्र में प्रवेश जहां जहां उनके स्वागत में नागौर जिला भाजपा पालक पालडे बिछाए खड़ी थी ।


मीडिया से बातचीत में हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेसी उम्मीदवार ज्योति मिर्धा पर  तंज कसते हुए कहा कि अब यह किसान का बेटा ऐसे नेताओं को ससुराल भेजेगा। बेनीवाल के स्वागत में मकराना विधायक रूपाराम , नावा से पूर्व विधायक विजय सिंह, परबतसर से पूर्व विधायक मान सिंह, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश मोदी सहित उनकी पूरी कार्यकारिणी ने बेनीवाल का स्वागत किया । इस मौके पर मीडिया से रूबरू हुए बेनीवाल ने कहा कि नागौर लोकसभा क्षेत्र के युवाओं में भरपूर उत्साह है और एनडीए इस बार रिकॉर्ड मतों से नागौर से जीत हासिल करेगी इसके अलावा भाजपा-आरएलपी गठबंधन के कारण राजस्थान की सभी 25 सीट जीतेंगे यही नही पंजाब हरियाणा, यूपी एमपी में भी भारी सीटें जीतेंगे ।



 उन्होंने  काँग्रेस उम्मीदवार ज्योति मिर्धा का नाम लिए बगैर उन पर तंज कसते हुए कहा कि नागौर से  ऐसे भी उम्मीदवार है जो  जीतने के बाद मतदाताओं को कभी शक्ल ही नही दिखाते और दिल्ली में ही रहते है । नरेंद्र मोदी को फिर से भारत का प्रधानमंत्री बनाने की पुरजोर पैरवी करते हुए बेनीवाल ने कहा कि श के प्रधानमंत्री को हराने के लिए दूसरे देश के प्रधानमंत्री अलगावादी ताकते हराने के लिए एक हो जाए तो मैं आप लोगों से कहना चाहूंगा कि हमें भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ मजबूत करते हुए भारी बहुमत के साथ देश का प्रधानमंत्री बनाना है।



मोदी  देश के ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने देश की छवि और कीर्ति को देश विदेश में बढ़ाया है ऐसे ईमानदार बेदाग छवि के धनी भाई नरेंद्र मोदी को देश का फिर से देश का प्रधानमंत्री बनाना है क्योंकि देश  मोदी को दुबारा मांग रहा है इसलिए आरएलपी ने भाजपा से गठबंधन किया है । अपने चुनावी मुद्दों के बारे में हनुमान बेनीवाल ने कहा कि  राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा दिलवाना, बेरोजगार युवाओ को रोजगार, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कराना, आम आदमी को राहत ,किसानों की बिजली समस्या का समाधान हो उनको सम्मान मिले इसके साथ ही टोल मुक्त राजस्थान ही नही टोल मुक्त भारत की बात उनकी प्राथमिकताओं मे रहेंगे । नावां के बाद मंगलाना, परबतसर,बिदियाद और मकराना में भी बेनीवाल का स्वागत किया गया


अप्रैल 08, 2019

राजसमंद से भाजपा प्रत्याशी दीया कुमारी ने आज नामांकन किया दाखिल ह्जारो कि संख्या मे हुए लोग शामिल

राजसमंद से भाजपा प्रत्याशी दीया कुमारी ने आज नामांकन किया दाखिल ....




नामांकन दाखिल करने के बाद एक जनसभा का आयोजन किया गया जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री ओर राजस्थान प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने दिया कुमारी के पक्ष में मतदान करने की अपील की ।
जावड़ेकर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने पंचमहाभूतों में घोटाले किये है , जल - थल - वायु किसी को नही छोड़ा । राजस्थान की नवीन कांग्रेस सरकार ने भाजपा की भामाशाह योजना को खत्म किया , मोदीजी की गरीबो के लिए पांच लाख रुपए तक के इलाज की योजना को लागू नहीं होने देने का पाप किया ।
भारत को फिर एक बार मजबूत सरकार चाहिये जो देश के दुश्मनों को सबक सिखाने का दम रखती हो । राजसमंद से दिया कुमारी को जितना है और फिर से सरकार बनाना है ।

प्रत्याशी दिया कुमारी ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वे बाहरी नही इस राजस्थान की बेटी है । मेरे पिता ने सेना में देश सेवा की उन्हें महावीर चक्र सम्मान मिला , आप सभी भी मुजे एक मौका दे अपनी सेवा करने का ।
मैं राजसमंद की जनता को विश्वास दिलाती हु की कोई भी कभी भी आसानी से मिल सकेगा अपनी बात बता सकेगा , में जन सेवक हु , राजकुमारी नही ।

सभा मे सभी विधानसभाओ के विधायक , पंच सरपंच ,कार्यकर्ता ओर आम जन मौजूद रहा ।




शनिवार, 6 अप्रैल 2019

अप्रैल 06, 2019

30 साल बाद नागौर में गठबंधन का दोहराया जा रहा है इतिहास,साथी रहे नाथूराम मिर्धा व रामदेव बरणगांव के वंशज ज्योति मिर्धा हनुमान बेनीवाल अब आमने सामने है..

30 साल बाद नागौर में गठबंधन का दोहराया जा रहा है इतिहास, साथी रहे नाथूराम मिर्धा व रामदेव बरणगांव के वंशज ज्योति मिर्धा हनुमान बेनीवाल अबआमने सामने है..



भाजपा का आरएलपी के साथ गठबंधन होने से नागौर संसदीय क्षेत्र प्रदेश की वर्तमान में सबसे हॉट सीट बन गई है। करीब 30 साल बाद  नागौर में  गठबंधन का इतिहास  दोहराया जा रहा है। 30 साल पूर्व गठबंधन में साथी रहे नाथूराम मिर्धा व रामदेव बेनीवाल के वंशज आमने सामने है। इन दोनों में से दिल्ली की सत्ता पर कौन काबिज होगा वह नागौर के मतदाता तय करेंगे। 30 साल पुराना जीत का इतिहास भाजपा दोहरा पाएगी या कांग्रेस उस इतिहास को पलट कर रख देगी।


आरएलपी और भाजपा में गठबंधन के बाद प्रदेश की सियासत का मिजाज बदल चुका है। दूसरी ओर पचायत राज स्थापना की नीव रखने वाले नागौर संसदीय क्षेत्र के इतिहास पर गौर करे तो ऐसा पहली बार नही हुआ है। नागौर संसदीय क्षेत्र राजनीति की एक प्रयोगशाला रहा है। यहां ऐसे प्रयोग बार बार होते रहे है। पहले भी यहां गठबंधन हो चुके है। लोकसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने दूसरी बार गठबंधन उम्मीदवार के लिए सीट छोड़ी है। इससे पहले भाजपा ने यह प्रयोग 1980 में संगठन की स्थापना के बाद हुए दूसरे चुनाव में 1989 में किया था। नागौर संसदीय सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को हराने के लिए भाजपा ने 1989 के संसदीय चुनाव में जनता दल उम्मीदवार नाथूराम मिर्धा के लिए चुनाव समझौता कर यह सीट छोड़ी थी।


इससे पहले 1984 में हुए चुनाव में नाथूराम मिर्धा इसी सीट से तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा से चुनाव हार गए थे। लेकिन भाजपा से गठबंधन के बाद इस सीट से जनता दल के टिकट पर नाथूराम मिर्धा कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास मिर्धा से जीत गए थे। इस चुनाव के 30 वर्ष बाद भाजपा ने एक बार फिर कांग्रेस प्रत्याशी और नाथूराम मिर्धा की पौत्री डॉ.ज्योति मिर्धा को हराने के लिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल के साथ हुए चुनावी गठबंधन में यह सीट छोड़ी है। भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के सामने नागौर संसदीय सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई थी।


कांग्रेस की डॉ.ज्योति मिर्धा को प्रत्याशी घोषित करने के बाद एक सप्ताह के मंथन के बाद यह सीट गठबंधन में देने का निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व ने किया। एक बार फिर इस सीट पर चुनावी दंगल इसलिए भी रौचक हो गया है कि ज्योति मिर्धा के दादा नाथूराम मिर्धा और हनुमान बेनीवाल के पिता रामदेव चौधरी 1989 तक एक ही पार्टी में रहे थे। छात्र नेता से विधायक बनने तक के सफर में हनुमान बेनीवाल का कांग्रेस के विरोध में रहना भी भाजपा का बेनीवाल के लिए गठबंधन में सीट छोडऩा एक कारण रहा।लेकिन क्या इस बार का गठबंधन नागौर के भाजपा के लिए नया प्रयोग है?



गौरतलब है कि नागौर संसदीय क्षैत्र मे आठ विधानसभा क्षैत्रो मे 19 लाख 13 हजार 046 कूल मतदाता है जिसमे  9 लाख 95 हजार 101 पुरुष मतदाता है तो 9 लाख 17 हजार 945 महिला मतदाता है। अब युवा मतदाताओं का झुकाव किस तरफ ज्यादा रहेगा। उसी पार्टी की स्थिति लोकसभा चुनाव में मजबूत रहेगी वर्तमान आंकड़ों की अगर बात करें 62 हजार 843 मतदाता 18 से 19 वर्ष के युवा मतदाता हैं। साथ ही 12 लाख 46 हजार 681 ऐसे मतदाता है जो 40 साल की कम उम्र के मतदाता हैं।  काग्रेस की उम्मीदवार डॉ ज्योति मिर्धा और NDA के उम्मीदवार हनुमान बेनिवाल दोनो ही युवाओ की पहली पसंद है।



अगर 2014 के आकडों पर गौर करे तो भारतीय जनता पार्टी के सी.आर. चौधरी 4 लाख 14 हजार 791 वोट मिले तो कांग्रेस की डॉक्टर ज्योति मिर्धा को 3 लाख 39 हजार 573 वोट लेकर दुसरे नम्बर पर रही वही निर्दलीय ताल ठोक रहे हनुमान बेनीवाल को  1 लाख 59 हजार 980 वोट लेकर तीसरे नम्बर पर रहे। भारतीय जनता पार्टी 75 हजार 218 मतों से विजय रही थी और सीआर चौधरी सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे और मोदी सरकार में मंत्री बनें।



 इस बार भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी कलह की वजह से सीआर चौधरी का टिकट काटकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से राजस्थान में गठबंधन करके आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल पर भरोसा जताते हुए नागौर संसदीय सीट पर बीजेपी ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा और दांव हनुमान बेनीवाल पर खेला है।

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

अप्रैल 05, 2019

भाजपा का हनुमान बेनीवाल के साथ नागौर सीट का समझौता कहीं खुशी कहीं गम वाला! परंपरागत भाजपा वोट वोटर्स असमंजस में फंसे..

भाजपा का हनुमान बेनीवाल के साथ नागौर सीट का समझौता कहीं खुशी कहीं गम वाला! परंपरागत भाजपा वोटर्स असमंजस में फंसे..

नागौर लोकसभा सीट को समझौते के तहत हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी को देने के कारण भाजपा संगठन में कहीं खुशी कहीं गम का माहौल है।भाजपा ने करीब 35 साल बाद किसी अन्य पार्टी को नागौर सीट समझौते में दी है। पिछली बार पूरी 25 सीटें जीत चुकी भाजपा इस बार भी पूरी सीटें जीतने के उद्देश्य से जातीय समीकरण साधने के मकसद से हनुमान बेनीवाल के साथ समझौता किया है इसका असर भाजपाइयों पर साफ नजर आ रहा है। दबे मन से ही सही कहने को मजबूर है कि बेनीवाल को जिताना ही हमारा लक्ष्य है। भाजपाइयों को गम इस बात का है कि इस बार ईवीएम में कमल का फूल नहीं होगा।

देखिए भाजपा के कार्यकर्ता क्या कह रहे हैं...



विधानसभा चुनाव में हार झेल चुकी भाजपा अब लोकसभा चुनाव में गठबंधन के साथ मैदान में उतर रही है। पिछली बार सभी 25 सीटें जीत चुकी भाजपा ने जातीय समीकरण साधने के मकसद से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलटीपी) से हाथ मिलाया है। आरएलटीपी अब एनडीए के घटक दल के तौर पर नागौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेगी। राजस्थान की राजनीति में यह गठबंधन बड़ा बदलाव लेकर आया है। इससे कई सीटों के समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं इससे जहां भाजपा कुछ स्थानों पर मजबूत हुई है तो कांग्रेस की चिन्ता भी बढ़ी है।

देखिए भाजपा के कार्यकर्ता क्या कह रहे हैं...


भाजपा के स्थानीय संगठन की बात करें तो इस समय असमंजस की स्थिति में आ गए हैं । हनुमान बेनीवाल  नागौर से चुनाव लड़ने का असर भाजपा के परंपरागत वोटों पर पड़ा है । जिन्होंने कभी भाजपा के अलावा  किसी पार्टी को वोट नहीं दिया है वह आज  दोराहे पर खड़े हैं। जानकार मानते हैं कि भाजपा ने समझौता तो कर लिया है लेकिन परंपरागत वोट उनको घटक दल हस्तांतरित करने में भारी दिक्कत आएगी।


देखिए भाजपा के कार्यकर्ता क्या कह रहे हैं...



 दूसरी ओर रालोपा व भाजपा के गठबंधन पर नागौर भाजपा जिला अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने जारी किये प्रेस बयान में कहा है कि कहीं खुशी का अवसर है बेनीवाल हमारी पार्टी की विचारधारा से ही जुड़े थे।
 भाजपा नागौर के जिला अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी व भाजपा के गठबंधन से  निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि केन्द्रिय चुनाव समिति के निर्णय को स्वीकार करते हुए हमारा लक्ष्य अब मिलकर हनुमान बेनीवाल को सर्वाधिक मतों से जिताकर लोकसभा में भेजना है। शर्मा ने जारी प्रेस बयानों में कहा कि हनुमान बेनीवाल 2008 में भाजपा से ही विधायक बने थे और अब उन्होंने राष्ट्रहित में भाजपा के साथ गठबंधन का निर्णय लिया है।




इस अवसर पर युवा मोर्चा के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मुंडेल ने कहा कि हमारा लक्ष्य नरेंद्र मोदी को वापिस पीएम बनाना है और पार्टी के केंद्रीय नेतृव ने जो निर्णय लिया है उसको हमे मिलकर आगे बढ़ाना है और हनुमान बेनीवाल ने अलग से दल बनाकर चुनाव जरूर लड़ा मगर उनकी विचारधारा कभी कोंग्रेस की नही रही।

समझौते के समीकरणों की बात करें तो विधानसभा चुनाव में बाड़मेर की 7 और जैसलमेर की एक विधानसभा सीट आती है। इनमें से भाजपा सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। जबकि चार सीट पर रालोपा ने अच्छे-खासे वोट हासिल कर भाजपा को हराने का काम किया था। यहां अक्सर जाट-राजपूत के बीच मुकाबला होता है। कांग्रेस ने मानवेन्द्र सिंह को टिकट दे दिया है। यदि अब भाजपा यहां से किसी जाट को उतारती है तो निश्चित तौर पर जाट उसकी तरफ जाएंगे और मुकाबला नजदीकी के साथ रोचक होगा। नागौर जिले की दस में से आठ सीट आती है। इनमें से कांग्रेस से 5, भाजपा से 2 और रालोपा से एक विधायक है। हनुमान बेनीवाल की खींवसर सीट भी इसमें ही आती है। विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन इस लोकसभा के विधानसभा क्षेत्रों में खासा लचर रहा था। यही वजह है कि भाजपा ने यह सीट बेनीवाल के लिए छोड़ दी है। बेनीवाल खुद पिछला लोकसभा चुनाव निर्दलीय लड़ चुके हैं, तब उन्हें करीब डेढ़ लाख से अधिक वोट मिले थे।
----प्रवीण चौहान----

गुरुवार, 4 अप्रैल 2019

अप्रैल 04, 2019

ज्योति मिर्धा का हनुमान बेनीवाल पर जुबानी हमला. आरएलपी-भाजपा गठबंधन और बेनीवाल की नागौर से उम्मीदवारी पर गरजी ज्योति.

ज्योति मिर्धा का हनुमान बेनीवाल पर जुबानी हमला. आरएलपी-भाजपा गठबंधन और बेनीवाल की नागौर से उम्मीदवारी पर गरजी ज्योति. 


बोली - क्या मुंह दिखाएंगे अपने कार्यकर्ताओं को, 10 दिन पहले भाजपा पर लगाए थे टिकट बेचने के आरोप..


नागौर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट मिलने के बाद ज्योति मिर्धा आज पहली बार लोकसभा क्षेत्र के दौरे पर हैं। किशनगढ़ के रास्ते सबसे पहले वे परबतसर पहुंची जहां विधायक रामनिवास गावड़िया ललाडनूँ विधायक मुकेश भाकर पूर्व विधायक मोहनलाल चौहान सहित भारी तादाद में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने ज्योति मिर्धा का स्वागत किया इस मौके पर भाजपा से तीन बार विधायक रहे राकेश मेघवाल ने भी लोकसभा चुनाव में ज्योति मिर्धा को समर्थन देने का एलान कर दिया ।



मीडिया से रूबरू हुई ज्योति मिर्धा ने भाजपा और आरएलपी के राजस्थान में गठबंधन और नागौर से हनुमान बेनीवाल को भाजपा समर्थित उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि हनुमान बेनीवाल पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं. कुछ दिन पहले तो भाजपा पर टिकट बेचने का आरोप लगा रहे थे और आज खुद ही भाजपा की गोद में जाकर बैठ गए हैं.


उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान हनुमान बेनीवाल ने भाजपा की बी टीम के रूप में काम किया और वोटों का धुर्वीकरण करने का काम किया लेकिन अब सच्चाई जनता के सामने है । ज्योति मिर्धा यहीं नहीं रुकी उन्होंने बेनीवाल पर जुबानी हमला करते हुए कहा कि जिन कार्यकर्ताओं को वे भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ पाठ पढ़ाया करते थे अब हनुमान बेनीवाल खुद उन कार्यकर्ताओं को क्या मुंह दिखाएंगे

बाइट - ज्योति मिर्धा (काँग्रेस प्रत्याशी)

अप्रैल 04, 2019

नागौर लोकसभा सीट का सस्पेंस खत्म, भाजपा ने आरएलपी के खाते में डाली सीट, हनुमान बेनीवाल होंगे नागौर से प्रत्याशी। नागौर सीट पर भाजपा ने फिर चौंकाया!

नागौर लोकसभा सीट का सस्पेंस खत्म, भाजपा ने आरएलपी के खाते में डाली सीट, हनुमान बेनीवाल होंगे नागौर से प्रत्याशी। नागौर सीट पर भाजपा ने फिर चौंकाया!


नागौर लोकसभा सीट के लिए सस्पेंस खत्म हो गया है। भाजपा ने राजस्थान में आरएलपी के साथ गठबंधन किया। आरएलपी एनडीए का राजस्थान में घटक दल होगा। नागौर सीट पर खींवसर विधायक व आरएलपी  संयोजक हनुमान बेनीवाल उम्मीदवार होंगे। बेनीवाल का कांग्रेस उम्मीदवार ज्योति मिर्धा से अब मुकाबला होगा। 




बेनीवाल पूरे राजस्थान में भाजपा के स्टार प्रचारक बनकर प्रचार करेंगे। नागौर सीट आरएलपी के खाते में जाने से नागौर वर्तमान सांसद  केंद्रीय राज्य मंत्री सी आर चौधरी के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। नागौर सीट आरएलपी  के खाते में जाने के बाद सीआर चौधरी का अब क्या रुख रहेगा यह भी क्लियर नहीं हो पाया है।




वैसे देखा जाए तो हनुमान बेनीवाल को राजनीति में उफान लाने वाला नेता माना जाता रहा है। कुछ दिन पूर्व कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की खबरें आई थी। इस गठबंधन के प्रति हनुमान बेनीवाल पूरी तरह आश्वस्त थे। लेकिन कांग्रेस ने एन वक्त पर हनुमान बेनीवाल को छिटकते हुए किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार कर दिया था। अकेले के बूते पर आरएलपी राजस्थान में चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं नजर आ रही थी।



 पिछले 3 दिनों से हनुमान बेनीवाल भाजपा नेताओं के साथ गठबंधन को लेकर वार्ता कर रहे थे। इसी के चलते भाजपा भी अपने पत्ते नहीं खोल रही थी। नागौर सीट के लिए हमेशा की तरह चौकाने वाले निर्णय देने की उम्मीद में लोगों में सस्पेंस बरकरार रहा। गुरुवार सवेरे भाजपा में आरएलपी ने समझौता करके एक बार फिर नागौर वासियों को चौंका दिया है।

वाह री राजनीति

कांग्रेस के साथ गठबंधन होने की प्रबल संभावना देखते हुए पिछले दिनों हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस के प्रति नरम रुख रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को प्रेस के सामने दिए अपने बयान में खूब खरी-खोटी सुनाई थी। आज भाजपा का पल्लू थामते ही सुर बिल्कुल चेंज हो चुके हैं। इसीलिए तो कहते हैं नेता जनता की कठपुतली नहीं होते,जनता ही नेता की कठपुतली होती है।