नशे का कारोबार: जब पूरा परिवार ही बन गया मौत का सौदागर
कहते हैं कि अपराध कभी अकेला नहीं आता। वह धीरे-धीरे इंसान की सोच, परिवार और आने वाली पीढ़ियों तक को अपने जाल में फंसा लेता है। नागौर जिले के डेह गांव से सामने आई एक घटना इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। यहां एक ऐसा परिवार सामने आया है, जिसने नशे को सिर्फ धंधा नहीं बल्कि जैसे अपनी विरासत बना लिया। घर का मुखिया पहले से ही ड्रग तस्करी के आरोप में जेल में है, लेकिन उससे सबक लेने के बजाय पत्नी और बेटे ने उसी रास्ते को आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया।
एएनटीएफ और स्थानीय पुलिस ने जब दबिश दी, तो किराणा दुकान की आड़ में चल रहा यह काला कारोबार सामने आ गया। पुलिस ने मां-बेटे को गिरफ्तार कर उनके पास से 27.37 ग्राम अवैध एमडी और 50 हजार से ज्यादा की ड्रग मनी बरामद की।
किराणा दुकान… या मौत का अड्डा?
गांव में यशोदा की एक छोटी-सी किराणा दुकान थी। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य दुकान लगती थी, जहां लोग नमक, तेल या रोजमर्रा का सामान खरीदने आते होंगे। लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा खतरनाक थी।
बताया जा रहा है कि यही दुकान नशे के आदी लोगों के लिए एमडी सप्लाई का केंद्र बन चुकी थी। दुकान केवल एक मुखौटा थी, जिसके पीछे युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने वाला कारोबार चल रहा था।
यशोदा का बेटा संजय उर्फ पिंटू इस नेटवर्क को गांवों और ढाणियों तक फैलाने का काम करता था। पिता पहले से जेल में था, लेकिन परिवार ने उस रास्ते को छोड़ने की बजाय उसी पर आगे बढ़ने का फैसला किया।
अपराध की विरासत
इस पूरे मामले की सबसे चिंताजनक बात यह है कि यहां अपराध किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा। पिता संतोषराम पहले से ही तस्करी के मामलों में जेल में है। बेटा संजय ने पिता के जेल जाने के बाद धंधे की कमान संभाल ली।
मां यशोदा भी लालच के चलते इस काले कारोबार में शामिल हो गई।
यानी एक परिवार, जो समाज के लिए उदाहरण बन सकता था, वही नशे के जाल का केंद्र बन गया। एएनटीएफ को मुखबिर से सूचना मिली थी कि डेह गांव में बड़े स्तर पर नशे का कारोबार चल रहा है। पुलिस टीम जब संतोषराम के घर पहुंची तो गेट खुला मिला।
अचानक पुलिस को सामने देखकर मां-बेटे के चेहरे से रंग उड़ गया। तलाशी के दौरान कमरे से एमडी और नकद पैसे बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
असली सवाल: लालच इतना क्यों?
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक गहरा सवाल भी खड़ा करती है। क्या कुछ पैसों के लालच में इंसान इतना अंधा हो सकता है कि वह दूसरों के बच्चों की जिंदगी बर्बाद करने लगे?
नशा बेचने वाला शायद कुछ समय के लिए पैसे कमा लेता है, लेकिन वह भूल जाता है कि यह पैसा कभी सुख नहीं देता। अक्सर ऐसे रास्ते का अंत जेल, बदनामी और टूटे हुए परिवार के रूप में ही होता है।
समाज के लिए सबक
डेह गांव की यह घटना हमें कई बातें सिखाती है।
पहली बात—अपराध कभी समाधान नहीं होता।
दूसरी बात—नशे का कारोबार सिर्फ कानून का नहीं, समाज का भी दुश्मन है।
और तीसरी बात—जब परिवार गलत रास्ते पर चल पड़े, तो उसका असर पीढ़ियों तक जाता है।
आज जरूरत है कि समाज ऐसे मामलों पर सिर्फ खबर पढ़कर आगे न बढ़ जाए, बल्कि जागरूक बने। यदि कहीं भी नशे का कारोबार दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए। क्योंकि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, पूरे समाज को खोखला कर देता है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें