..तो क्या एक वायरल वीडियो ने पूर्व मंत्री हबीबुर्रहमान की बेटी को बासनी सरपंच चुनाव में हरा दिया! देखें वीडियो जिसमें महिलाएं सुना रही है खरी-खोटी..
नागौर। एक बार राज्य मंत्री और पांच बार विधायक रह चुके हबीबुर्रहमान अशरफी लांबा की बेटी शाहीन सरपंच उपचुनाव में हार गई। उपचुनाव में वोटिंग के दौरान 20767 में से 9590 वोट ही पड़े। पूर्व मंत्री की बेटी अपने ही गढ़ में मात्र 20% वोट ही ले सकी। जबकि उनके प्रतिद्वंदी पूर्व उप जिला प्रमुख चांदबीबी 6656 वोट हासिल कर 4696 वोटों के बड़े अंतर से जीत गई।
पूर्व सरपंच व विधानसभा प्रत्याशी रहे शौकत अली की पुत्रवधू शबनम बानो को मात्र 906 वोट ही मिले और वह तीसरे स्थान पर रही। चुनाव में पूर्व मंत्री ने अपनी बेटी को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा था। यह चुनाव हबीबुर्रहमान की प्रतिष्ठा का सवाल भी था।
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इन सब में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि पूर्व मंत्री अपनी ही बेटी को अपने ही गांव में आखिर कैसे जीता नहीं पाए?
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1. बासनी में पहली बार 46.18% वोट डाले गए। बासनी के इतिहास में पहली बार इतना कम वोट प्रतिशत हुआ है। क्या जो वोट नहीं पडे वे हबीबुर्रहमान के पक्ष वाले थे? लोग परिवारवाद के खिलाफ हो गए या स्थानीय मुद्दे हावी रहे।
2. उपचुनाव प्रचार के दौरान पूर्व विधायक व मंत्री रह चुके हबीबुर्रहमान का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें पूर्व मंत्री एक गली में बेटी के लिए वोट मांगते हुए विकास करवाने की बात कर रहे हैं। इस दौरान आसपास की महिलाओं ने पानी का मुद्दा उठाया और बोल रही है कि पानी तो आवे ही कोनी, महीना दो महीना आता नहीं है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पानी की कमी का स्थानीय मुद्दा बन जाने से क्या लोगों ने पानी के लिए वोट नहीं दिया?
गौरतलब है कि जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सही बात 1 महीने तक पानी की आपूर्ति नहीं होती है। लोगों का आरोप है कि इस मामले में स्थानीय लाइन में भी अपनी मनमानी करते हैं। अपनी पसंद की गली मोहल्ले या कॉलोनी में मन मर्जी हो तब सप्लाई दे देते हैं। इस संबंध में कई बार शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हो पाया।





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