अरे यह क्या हो गया - हनुमान बेनीवाल की पार्टी का सिंबल बोतल भी ईवीएम में नहीं होगा? जानिए आखिर ऐसा क्या हो गया कि बेनीवाल को बोतल की जगह टायर का सिंबल लेना होगा.
भाजपा और आरएलपी ने गठबन्धन के बाद हनुमान बेनीवाल को नागौर से एनडीए के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतारकर नागौर लोकसभा सीट को प्रदेश की हॉट सीटों में से एक बना दिया है । लेकिन इस चुनाव में हनुमान बेनीवाल का चुनाव चिन्ह क्या होगा इसको लेकर निर्वाचन आयोग का रुख स्पष्ट हो चुका है। हम आपको बता देते है कि इस बार नागौर लोकसभा चुनाव में ईवीएम में मतदाताओं को भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल का निशान देखने को नही मिलेगा क्योंकि भाजपा ने गठबन्धन के वायदे के मुताबिक नागौर सीट आरएलपी के लिए छोड़ दी है। तो फिर सवाल ये है कि क्या बेनीवाल का एनडीए के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव चिन्ह उनकी पार्टी का जो सिम्बल है 'बोतल' , वो होगा ।
इसकी वजह भी हम आपको बता देते है । दरअसल मुख्य निर्वाचन आयोग ने आरएलपी को चुनाव चिन्ह टायर रिकमंडेड किया है।
चुनाव आयोग से मिले पत्र के अनुसार आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल नहीं होने से यह साफ हो गया है कि नागौर लोकसभा क्षेत्र के मतदाता को भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल का फूल व आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल ईवीएम पर नहीं मिलेगा। और एनडीए को सपोर्ट करने वाले मतदाताओं को किसी तीसरे चिन्ह पर ही वोट करना होगा।
जानकारी के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने आरएलपी के साथ सीटों का समझौता करते हुए नागौर लोकसभा क्षेत्र की सीट आरएलपी को दी है। सभी अब तक मानकर चल रहे थे कि आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल ही ईवीएम पर रहेगा। लेकिन आज जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश कुमार यादव को निर्वाचन आयोग की ओर से मिले पत्र के अनुसार चुनाव चिन्ह बोतल आरएलपी को आवंटित नहीं की जा सकती है। राष्ट्रीय पार्टियों की श्रेणी में यह चुनाव चिन्ह बोतल तेलंगाना की एक क्षेत्रीय पार्टी को पूर्व में ही आवंटित की जा चुकी है।
आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने अपने चुनावी सिंबल के लिए 25 दिन पूर्व ही आवेदन किया है जबकि नियमानुसार निर्वाचन आयोग को 2 माह पूर्व सिंबल रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होता है। जिला निर्वाचन अधिकारी को मिले पत्र के अनुसार आरएलपी के लिए चुनावी सिंपल टायर रिजर्व में रखा गया है। अगर हनुमान बेनीवाल आरएलपी से ही चुनाव लड़ते हैं तो यह पक्का है कि बोतल की जगह अब ईवीएम में उनके नाम के आगे टायर का निशान होगा। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल रजिस्टर्ड हुआ था। उसी के आधार पर चुनाव लड़ते हुए आरएलपी ने विधानसभा चुनाव में तीन सीटें जीती थी। आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध हो गया था। ऐसे में लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव चिन्ह बदल जाने से काफी दिक्कत आ सकती है। चुनाव में 'बोतल' सिम्बल नही मिल पाने की बात खुद हनुमान बेनीवाल भी कबूल कर चुके है
जानकार सूत्रों के अनुसार आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल बोतल चुनाव चिन्ह नहीं मिलने से पेशो- पेश की स्थिति में फंस गए हैं। अगर चुनाव चिन्ह टायर मिलता है तो एक बार फिर सब कुछ नए सिरे से तैयार करना होगा।


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