कोविड-19 की नई गाइडलाइंस की कंट्रोवर्सी! वाह क्या तोड़ निकाला है? शहरी बच्चे ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ने जाएंगे तो नहीं होगा कोरोना! शहरी और ग्रामीण इलाके की स्कूल के फेर में फंसे अभिभावक। जानिए क्या है पूरा मामला?
प्रतीकात्मक फोटो..नागौर। "सरकार की नई गाइडलाइन हम पर लागू नहीं होती" जी हां यह वाक्य उन प्राइवेट स्कूल संचालकों के हैं जो अपना स्कूल शहर के लगते ग्रामीण इलाकों में खोलकर बैठे हैं। जिनमें 99 प्रतिशत शहरी क्षेत्र के ही बच्चे पढ़ने जाते हैं। कल सरकार की ओर से जारी हुई गाइडलाइन को धता बताते हुए मानने से इंकार कर दिया कि उनके स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में है उन पर सरकार की नई गाइडलाइन का आदेश लागू नहीं होता है।
शहरी क्षेत्र के बच्चों को ग्रामीण क्षेत्र में स्थित अपने स्कूल जाने और नहीं जाने को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। आज सवेरे अभिभावक सरकार की गाइडलाइन मानकर अपने बच्चों को स्कूल के लिए तैयार नहीं किया था परंतु स्कूल वाहन घर पर पहुंचने पर पता चला कि स्कूल संचालित होगी।
अभिभावकों ने स्कूल में फोन लगाया तो जवाब मिला कि उनपर नई गाइडलाइन का नियम लागू नहीं होता है, वह तो ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ाते हैं।
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स्कूल संचालन को लेकर अभिभावक पशोपेश में है कि क्या करें? बड़ा सवाल यह है कि सभी बड़ी निजी स्कूल शहर से लगते ग्रामीण इलाकों में स्थित है, जहां 99% बच्चे शहरी इलाकों के ही पढ़ते हैं।
वली मोहम्मद, गुलाम मुस्तफा, बर्तन बाजार खाई गली नागौर। बर्तनोंं का सबसेेे विश्वसनीय शोरूम। मोहम्मद जावेद गोरी - 9413367860स्कूल भेजने के प्रति अभिभावक इसलिए चिंतित हैं कि कोरोना का नया वेरिएंट तेजी से पैर पसार रहा है. बच्चों को कब तक वैक्सीन नहीं लग पाई है. ऐसे में बच्चों को कोरोना हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा.
निजी स्कूल ग्रामीण इलाकों में होने का हवाला देकर बच्चों को बुलाते रहे तो क्या कोरोना नहीं फैलेगा? सरकार ने कई बार गाइडलाइन ऐसे जारी की है कि लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा होती है।
नई गाइडलाइन लागू नहीं होने का हवाला देकर कई स्कूल संचालकों ने अभिभावकों को मैसेज किया है कि सरकार की गाइडलाइन उन पर लागू नहीं होती वह ग्रामीण इलाकों में स्कूल संचालित करते हैं।

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