राज्य सरकार ने शिक्षा को ग्रामीण व शहरी में बांटने का काम किया है, यह कार्य बहुत घातक सिद्ध होगा. जानिए किसने सरकार के खिलाफ बिगुल बजाया है?
नागौर. जिला प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की तरफ से आज मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देकर प्राइवेट स्कूलों को खोलने की पुरजोर मांग की है. बार-बार शिक्षण संस्थानों को बंद करने के आदेश देकर सरकार बच्चों को पढ़ाई से वंचित कर पीछे धकेल रही है.
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शहरी क्षेत्र की स्कूलों को बंद करने की निंदा करते हुए एसोसिएशन सचिव विनय शर्मा ने कहा कि सरकार ने शिक्षा को ग्रामीण व शहरी में बांटने का काम किया है,
यह बांटने का कार्य घातक सिद्ध होगा इसकी हां पुरजोर निंदा करते हैं. शिक्षा में यह बंटवारा उचित नहीं है. उन्होंने बताया कि बच्चों के गिरते शिक्षा के स्तर को बचाने के लिए विद्यालय पुनः संचालन की अनुमति प्रदान की जाए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ओमीक्रोन की स्थिति स्वास्थ्य विभाग व डब्ल्यूएचओ के अनुसार अति संवेदनशील नहीं है.
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कलेक्टर को दिए ज्ञापन में एसोसिएशन की ओर से बताया गया है कि 10 जनवरी से प्रारंभिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण पत्र, आठवीं बोर्ड के आवेदन भरे जाने हैं। इस कक्षा को भी राज्य सरकार के आदेशानुसार नहीं बुलाया जा सकता। साथ ही बताया कि 17 जनवरी से 5 फरवरी 2022 के मध्य कक्षा 12वीं के प्राइवेट परीक्षाओं का आयोजन प्रस्तावित है।
यदि प्रायोगिक परीक्षा से पूर्व विद्यार्थियों को संबंधित विषय में प्रायोगिक अभ्यास भी जरूरी है। संगठन या नहीं चाहता कि कोई विद्यार्थी इस महामारी की चपेट में आए, लेकिन यह भी नहीं चाहता कि शिक्षा का स्तर गिरे। पूर्व की भांति समय-समय पर जारी एसओपी की दिशा निर्देशों की पालना की जा रही है।
कक्षा में सैनिटाइजर, मास्क का प्रयोग, सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इस मौके पर एसोसिएशन अध्यक्ष मानक चौधरी, कोषाध्यक्ष पहलाद चौधरी, शैतान राम चांगल, शिवदान, राजेंद्र, दिलदार, हरदेव राम गारू, हनुमान राम आदि स्कूल संचालक मौजूद रहे।

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