कौन बनेगा मारवाड़ का बाजीगर? भाजपा बचा पाएगी अपनी सीटें या कांग्रेस छीनेगी अपना किला !
इस बार के विधानसभा चुनाव में मिशन 180 को लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ताल ठोक रखी है। इसी मिशन के तहत मारवाड़ क्षेत्र की 43 सीटों के अंतर्गत आने वाली नागौर जिले की 10 विधानसभा को टटोलने अाज नागौर जिले के दौरे पर आ चुकी है। मुख्यमंत्री राजे की गौरव यात्रा का आगाज मेड़ता सिटी के धार्मिक स्थल मीरा मंदिर से आज हो चुका है। साथ ही डेगाना के पुदलोता गांव, परबतसर एवं कुचामन में आम सभा के साथ अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाकर वोटरों को लुभाने का प्रयास करेंगी।
वर्तमान में नागौर जिले की 10 विधानसभा सीटों में से 9 पर भाजपा का कब्जा है, एक सीट निर्दलीय के खाते में है। वर्षों से कांग्रेस का गढ़ रही नागौर जिले के 10 सीटों पर मोदी लहर के चलते पिछली बार कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई थी ।
राजस्थान के सियासी समर में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लगातार राजस्थान दौरे कर रहे हैं, नागौर में किसान सम्मेलन आदि के जरिये। वही परबतसर मे काग्रेस ने संकल्प रैली के जरिये ताकत दिखाई है और अब नेता जमीनी हकीकत टटोलते हुए नजर आ रहे हैं।सीटों के लिहाज से राजस्थान के सबसे बडा क्षेत्र मारवाड़ है जो कभी काग्रेस का गढ था। जोधपुर संभाग के 6 जिले-बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, पाली, सिरोही की कुल 33 सीट और नागौर जिले की 10 सीटों को मिलाकर कुल 43 विधानसभा क्षेत्र हैं. लेकिन कांग्रेस का गढ़ रहे मारवाड़ में पिछले चुनाव में बीजेपी ने 39 सीट जीत कर इस गढ़ को ढहा दिया था। कांग्रेस के खाते में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीट समेत महज तीन सीट आई ।
नागौर जिले की 10 विधानसभा सीट-नागौर, जायल, मेड़ता, लाडनू और डीडवाना नांवा परबतसर मकराना डेगाना सभी सीट पर बीजेपी का कब्जा है। मात्र खिवसर से एक सीट पर निर्दलीय ने कब्जा जमाया।
अब कांग्रेस अपना वजूद वापस पाने के लिए चुनाव आने के साथ ही सक्रिय हो गई है, लेकिन पिछले 4 साल को देखें तो लगता है कि कांग्रेस ने विपक्ष का धर्म सही नहीं निभाया है। सरकार की नाकामियों व गलत नीतियों को समय पर और सही रूप से आम जनता के बीच नहीं रखें। अब भी मुद्दे स्थानीय नहीं रख कर केंद्र स्तरीय मुद्दों को भुनाने मे लगी है। टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त भी जीत में अड़ंगा लगा सकती है। नागौर जिले की बात करें तो फिलहाल आज की स्थिति में कौन सी सीट स्पष्ट रूप से जीत सकते हैं दावे के साथ कोई नहीं कह सकता है।
दूसरी ओर सत्ताधारी भाजपा की बात करें तो नागौर जिले में वर्तमान विधायकों के भरोसे सभी सीटें जीतने में नाकाम रहेगी। सत्ता के मद में आमजन को भूलने के आरोप लगते रहे हैं। इन दो पार्टियों के अलावा अन्य प्रत्याशी वोटरों का संतुलन बनाने का काम करेंगे।


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