यह नागौर है, यहां इंजीनियर की क्या जरूरत है? हम बेलदारी ही काफी है!
नागौर 25 सितंबर । पिछले 4 दिन से शहर के वार्ड नंबर 23 में सीवरेज लाइन डालने का काम चल रहा है जो मात्र बेलदारों के भरोसे ही चल रहा है। बिना नाप चौप के खड्डा खोदकर पाइप लाइन पसार दी है। चेंबर बनाने के लिए भी घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है। किसी भी सरकारी नुमाइंदे और इंजीनियर ने आकर भी नहीं झांका है। मजदूरों का कथन हम ही इंजीनियर हैं।
जानकारी अनुसार सीवरेज लाइन डालने से पुर्व निर्धारित इन नाप के अनुसार खड्डा होना जरूरी है। पाइप अंदर बिछाने से पूर्व कंक्रीट को बिछाकर जगह लेवल में होना जरूरी है लेकिन इन सब को नजरअंदाज कर रात के अंधेरे में पाइप लाइन डालकर गड्ढों को भरा जा रहा है। चेंबर के लिए सीमेंट मिश्रण मैं सीमेंट दस्तूर के तौर पर डाल रहे हैं। कल शाम को बनाए गए चेंबर मे लगा सीमेंट मिश्रण हाथ लगाने से ही भरभरा कर टूट रहा है जबकि सीमेंट 8 घंटे में पत्थर के माफिक कड़क हो जाती है।
जानकार मानते हैं कि घटिया सीमेंट मिश्रण के कारण जो चेंबर बनता है उसके बार बार टूटने का कारण है क्योंकि वाहनों के आवागमन से वजन सहन नहीं कर पाते हैं और वह धंस जाते हैं। बड़ा सवाल यही है कि शहर में चल रहे इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए सरकारी नुमाइंदों की मॉनिटरिंग क्यों नहीं है। मनमाने तरीके से काम करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं होती है। आम जन की यही मानता है कि कमीशन खोरी के चलते कोई भी नहीं बोल रहा है।https://youtu.be/yxEsFl88JTI

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