लो जी फिर शुरू हो गई है स्कूल मार्केटिंग..
बेलगाम निजी स्कूल बेबस अधिकारी!
अपनी मनमर्जी से चलने वाले निजी स्कूल्स ने एक बार फिर अपने ग्राहकी बढ़ाने के लिए मार्केटिंग का फंडा शुरु कर दिया है। नागौर शहर में तो बकायदा कई स्कूलों ने घर-घर दस्तक देने की योजना शुरू की है। स्कूल के टीचर्स को कमीशन का लालच देकर इस गोरखधंधे में झोंका है। टीचर्स ग्रुप बनाकर शहर में घर-घर घूम कर पैरेंट्स से उनके बच्चों को उनकी स्कूल में दाखिले के लिए मोटिवेट कर रही है।
दूसरी ओर कुछ स्कूल्स बच्चों की नई ड्रेस के साथ नए कलेवर में उतरने की तैयारी कर रहे है। बकायदा पेरेंट्स को सूचना दे दी गई है कि अगले शिक्षा सत्र से स्कूल ड्रेस चेंज कर रहे हैं, संबंधित स्कूल ड्रेस दुकान से ड्रेस खरीद लें। इनमें कुछ स्कूल ऐसे भी है जो वर्षों से शिक्षा विभाग के नियमों को धता बताते हुए बेधड़क चल रहे हैं। नियमानुसार प्राइमरी स्कूल के बच्चों की कक्षा ग्राउंड फ्लोर पर होना अनिवार्य है,लेकिन ग्राउंड फ्लोर का तो अता-पता भी नहीं है, और तो और बच्चों के खेल कूद हेतु किसी भी प्रकार का प्ले ग्राउंड नहीं है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बात करें तो उनका जवाब यही होता है कि हमने मान्यता दे दी है। हमारे पास विभाग के अन्य काम का बोझ है इसलिए स्कूलों की जांच करने में हम असमर्थ हैं। विभाग के अनुसार मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों में प्ले ग्राउंड है और कोई भी प्राइमरी स्कूल फर्स्ट या सेकंड फ्लोर पर नहीं चल रही है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि जांच करें तो नागौर शहर में ही ऐसी कई स्कूल मिल जाएंगी जिनमें कई नामचीन बन चुकी है।


जब कमीशन शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक पहुंच रहा हो तो उनको स्कूलों की जांच करने की फुर्सत मिलने का सवाल ही नहीं उठता मान्यता देने के समय ही मनमर्जी से जेब भर ली जाती है और स्कूलों को आजाद कर दिया जाता है मनमानी फीस वसूलने के लिए....
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