पुलिस की अनदेखी से नाबालिगों के निकले पर? नाबालिगों के हाथों में वाहनों की कमान थमाई ?
नाबालिगों के हाथों में वाहनों की कमान थमा दी गई है?
यह कमान खुद परिजनों ने दी हुई है! बच्चे बड़े होते नहीं और परिजन उन्हें बाइक खरीद कर दे देते हैं। नाबालिग अधिकतर बाइकों पर ही स्कूलों जाते है। नाबालिग से हादसा हो जाए तो फिर इसकी जिम्मेवारी किसकी होगी? जी हां यह कड़वा सत्य है जिसकी अनदेखी नागौर में यातायात पुलिस और परिवहन विभाग कर रहा है। इसी का परिणाम है कि दिन भर व्यस्त सड़कों पर नाबालिग सरपट वाहन चलाते नजर आते हैं लेकिन यातायात पुलिस सिर्फ हेलमेट देखती है उसके अंदर के चेहरे को नजरअंदाज करती आ रही है ।
शहर में नाबालिगों से कई हादसे हो चुके हैं। कल की घटना को ही देख लो Scorpio गाड़ी से टक्कर लगने से एक महिला की मौत हो गई 2 घायल हुए । मौके पर मौजूद लोगों और सोशल मीडिया की खबर को सही माने तो सामने आया है कि Scorpio को नाबालिग चला रहा था साथ में एक अन्य बच्चा भी बैठा था जिसको टक्कर के बाद लोगों ने पकड़ा भी था । नागौर शहर में लंबे समय से देख रहे हैं कि कई नाबालिग ऑटो रिक्शा भी चला रहे हैं जिनकी भी अक्सर अनदेखी होती है।
मां-बाप हैं जिम्मेवार
जिस बच्चे की उम्र 18 साल से कम है, वह नियम के मुताबिक वाहन चलाने के लिए सक्षम नहीं हैं और मां-बाप खुद जिम्मेदार हैं कि वह अपने बच्चे को बाइक खरीद कर दे देते हैं, उसके बाद रफ्तार की कमान हाथ में आते ही बच्चे बाइकों को दौड़ाते हैं और हादसों का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।
अब इन पर शिकंजा कसने के लिए यातायात पुलिस को इस मुद्दे पर अहम कदम उठाना चाहिए। स्कूलों में होने वाली हर पेरैंट्स मीटिंग में यातायात पुलिस की ओर से उन्हें जागरूक किया जाए। स्कूल प्रबंधकों व बच्चों के परिजनों को बताया जाए कि वह नाबालिग को बाइक न दें क्योंकि इससे सड़क हादसे बढ़ते हैं।



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