नागौर कलेक्ट्रेट में छलकता है जाम!
नागौर कलेक्ट्रेट परिसर में इन दिनों शराब की खाली बोतलो का नजारा दिख रहा है। परिसर के अंदर डस्टबिन, पौधों की क्यारियां या फिर परिसर के अंदर ही बना गांधी पार्क हो बोतलें नजर आ ही जाती है। कई बार देखा गया है कि अहिंसा के पुजारी तीन मूर्ति के नीचे खाली बोतल पड़ी मिलती है। यह शराब का नशा ही है जो ऐसे निषेध क्षेत्रों में भी पीने को मजबूर कर देता है। नजरिए से देखें तो इसमें जिला प्रशासन की कमी नजर आती है। रात्रि के समय कलेक्ट्रेट परिसर के नए दरवाजे भी शराबियों को अंदर आने से नहीं रोक पा रहे हैं ? परिसर के गेट और दरवाजे हाल ही के दिनों में लाखों रुपए खर्च करके बनाए गए थे। जिला प्रशासन को यह भी पता करना चाहिए कि शराब पीने के शौकीन कहीं उनके स्टाफ तो नहीं है जो ऑफिस टाइम के बाद पार्टी करने का मजा लेते हैं।
नागौर कलेक्ट्रेट परिसर में इन दिनों शराब की खाली बोतलो का नजारा दिख रहा है। परिसर के अंदर डस्टबिन, पौधों की क्यारियां या फिर परिसर के अंदर ही बना गांधी पार्क हो बोतलें नजर आ ही जाती है। कई बार देखा गया है कि अहिंसा के पुजारी तीन मूर्ति के नीचे खाली बोतल पड़ी मिलती है। यह शराब का नशा ही है जो ऐसे निषेध क्षेत्रों में भी पीने को मजबूर कर देता है। नजरिए से देखें तो इसमें जिला प्रशासन की कमी नजर आती है। रात्रि के समय कलेक्ट्रेट परिसर के नए दरवाजे भी शराबियों को अंदर आने से नहीं रोक पा रहे हैं ? परिसर के गेट और दरवाजे हाल ही के दिनों में लाखों रुपए खर्च करके बनाए गए थे। जिला प्रशासन को यह भी पता करना चाहिए कि शराब पीने के शौकीन कहीं उनके स्टाफ तो नहीं है जो ऑफिस टाइम के बाद पार्टी करने का मजा लेते हैं।


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