बंशीवाला में गुरुदेव सियाग का गुंजा मंत्र, सैकड़ों लोगों ने ली शक्तिपात दीक्षा, स्वतः योगिक क्रियाओं के अनुभव से हुए रूबरू
नागौर। शहर के नगरसेठ बंशीवाला मंदिर में आमजन हेतु पूर्णतः निःशुल्क गुरुदेव सियाग सिद्धयोग दीक्षा शिविर का आयोजन हुआ। इस दौरान गुरुदेव की आवाज में संजीवनी मन्त्र द्वारा शक्तिपात दीक्षा लेकर ध्यान किया गया, जिसमें ध्यान के दौरान साधकों को विभिन्न प्रकार की ऑटोमेटिक यौगिक क्रियाएं, मुद्राए और अनुभूतियां हुई। शिविर के दौरान उपस्थित स्थानीय नागरिकों ने बताया कि यह एक नया और दिव्य अनुभव था। एक साधक ने बताया कि ध्यान के बाद पूरा शरीर बिल्कुल हल्का हो गया और असीम शांति और आनंद की अनुभूति हुई।
होटल चंद्रिका पैलेस, दूरसंचार भवन के सामने मानासर, नागौर। फोन- 01582242926, 7425817926.. उपलब्ध है AC. नॉन एसी रूम, पार्टियोंं के लिए हॉल आधुनिक सुविधाओं सहित
वहीँ एक साधक को ध्यान के दौरान स्वतः कपाल भाती प्राणायाम हुआ। साधको की सुविधा के लिए एलसीडी प्रोजेक्टर की व्यवस्था की गई थी जिस पर गुरुदेव सियाग के सिद्धयोग दर्शन की संक्षिप्त जानकारी की डॉक्यूमेंट्री चलाई गई जिसमें कुण्डलिनी शक्ति जागृत होने पर जीवन पर पड़ने वाले प्रभावो के बारे में बताया गया। इस दौरान 1994 से सिद्धयोग साधना कर रहे एडवोकेट लक्ष्मीनारायण दाधीच ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गृहस्थ जीवन मे रहते हुए इस साधना द्वारा ईश्वर का साक्षात्कार एवं मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।
इस हेतु आपको अपनी दिनचर्या में बस गुरुदेव सियाग के संजीवनी मन्त्र का जाप और गुरुदेव का ध्यान शुरू करना है। उसके बाद आपके जीवन में स्वतः सकारात्मक परिवर्तन आते जायेंगे। यह साधना कश्मीरी शैव दर्शन पर आधारित है एवं विज्ञान की तरह परिणाम देती है। आज योग के नाम पर जो करवाया जा रहा है वो केवल फिजिकल एक्सरसाइज मात्र है। असली योग कुण्डलिनी शक्ति द्वारा शरीर की आवश्यकता अनुसार स्वतः घटित होता है एवं यह केवल समर्थ सद्गुरुदेव रामलाल जी सियाग की आवाज में मन्त्र सुनकर गुरुदेव की फ़ोटो का ध्यान करने मात्र से जागृत हो जाती है और जागृत कुण्डलिनी शक्ति मनुष्य शरीर में स्थित सातों चक्रों का भेदन करते हुए सहस्रार तक पहुंचती है।
शिविर में मेड़ता से पधारे साधक दीपक भाटी ने इस दर्शन के बारे में बताया कि इस साधना के दौरान कई साधको को खेचरी मुद्रा लगती है, इस मुद्रा के बारे में विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि इस मुद्रा को महारानी मुद्रा कहते हैं , इस मुद्रा के दौरान जीभ तालु में धँसकर एक पॉइंट को दबाती है जिससे एक रस टपकता है, उस रस को अमृत की संज्ञा देते हुए महायोगी गोरखनाथ जी ने कहा है "गगन मंडल में उन्धा कुआ, ता अमृत का वाशा। सुगरा हुवे भर भर पिये नुगरा जाए प्यासा"
वली मोहम्मद, गुलाम मुस्तफा, बर्तन बाजार खाई गली नागौर। बर्तनोंं का सबसेेे विश्वसनीय शोरूम। मोहम्मद जावेद गोरी - 9413367860
Saswani Computer. कुम्हारी दरवाजा नागौर. मनीष सुराणा. 9828540216
भाटी ने बताया कि हजारों साधक जो असाध्य रोगों से पीड़ित थे वो इस साधना द्वारा आज पूर्णतः स्वस्थ जीवन यापन कर रहे हैं।
शिविर से पूर्व जितेंद्र बंसल, सुभाष परिहार, गोपाल वैष्णव, अनिल सांखला, दीपक भाटी आदि द्वारा घर-घर जाकर शिविर की जानकारी दी गयी। शिविर के पश्चात आयोजकों द्वारा बंशीवाला मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेश राठी एवं सदस्य ओमप्रकाश सोनी, पदमचंद प्रजापत का आभार व्यक्त किया गया।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें