तुगलकी फरमान.. 'नागौर' देश का ऐसा पहला शहर जहां पानी के लिए काटी जा रही है बिजली!
नागौर। कृत्रिम जल संकट के दौर से गुजर रहे नागौर शहर के लिए नगर परिषद की ओर से एक फरमान जारी हुआ है, जिसके तहत जल आपूर्ति के समय बिजली काटी जा रही है। नगर परिषद के इस फरमान पर शहर की जनता में आक्रोश व्याप्त है। लोग इसको तुगलकी फरमान बताते हुए मनमर्जी करने का आरोप लगाया है। डिस्कॉम ने भी नगर परिषद के आदेश पर शहर में यह व्यवस्था शुरू कर दी है। डिस्कॉम भी बिजली कटौती का आदेश अपने ऊपर नहीं लेकर नगर परिषद आयुक्त द्वारा भेजा गया आदेश सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। यह व्यवस्था कितने दिन रहेगी यह अब तक साफ नहीं हो पाया है। जबकि जल आपूर्ति के समय हुई बिजली कटौती से दूसरी व्यवस्थाएं चरमरा गई है। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद प्रशासन ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए यह आदेश जारी किए हैं।
जानकारी अनुसार राज्य सरकार ने वर्ष 2015 को शहर की जलापूर्ति व्यवस्था जलदाय विभाग से नगर परिषद को हस्तांतरित की थी। जब से जलापूर्ति की व्यवस्था परिषद के हाथ में आई है तब से संभाल नहीं पाई है। सर्दी हो या गर्मी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था बिगड़ी हुई है। इस वर्ष नहर बंदी के समय से ही पूर्णतया चरमरा गई है। ऐसा कोई दिन नहीं निकला है जब शहर की महिलाओं ने नगर परिषद व कलेक्ट्रेट के बाहर खाली मटकिया नहीं फोड़ी हो।
बिजली कटौती का फायदा आम लोगों की बजाय पानी चोरों को ज्यादा!
नगर परिषद ने तो जल आपूर्ति के समय बिजली कटौती करने का आदेश देकर इतिश्री कर ली मगर दूसरी और देखें तो इसका फायदा आम नागरिक के बजाय पानी चोरों को ज्यादा होगा। पानी चोरों ने हर स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्थाएं कर रखी है। पानी का कनेक्शन ज्यादातर मेन लाइन से जुड़े हुए हैं। कनेक्शन भी एक से अधिक और बड़ी पाइपलाइन द्वारा जोड़े गए हैं। बड़े बूस्टर लगाने के साथ ही बिजली की दूसरी व्यवस्थाएं भी कर रखी है। इस हालत में आम नागरिकों को राहत नहीं मिलने वाली है।
बिजली कटौती के साइड इफेक्ट..
बिजली भी अब मूलभूत सुविधाओं वाली आवश्यकता बन गई है। इसके बिना अब जीवन असंभव है। जल आपूर्ति के समय यह मूलभूत सुविधा छीनने से कई बीमार लोगों का जीवन संकट में पड़ सकता है। बिजली कटौती का समय सुबह 1 घंटे का किया गया है। इस दौरान बीमार व्यक्ति जिसके ऑक्सीजन भी लगा हो सकता है उसका जीवन खतरे में होगा। कई कामगार लोग नाइट शिफ्ट में काम करके सुकून की नींद सोने के लिए घर में होंगे। सुबह-सुबह बिजली कटौती होने से नींद में खलल पड़ेगा। इसके चलते पूरा दिन खराब होगा।
अमृत योजना का काम प्रगति पर होने का हवाला देकर कटौती..
डिस्कॉम को भेजे गए पत्र में नगर परिषद आयुक्त ने अमृत योजना का कार्य प्रगति पर होने का कारण बताया है, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में पूरी जल आपूर्ति नहीं पहुंच पा रही है। इसके लिए कई इलाकों में प्रतिदिन और कुछ इलाकों में एकांतरे बिजली कटौती करने को कहा है।
नहरी पानी की आपूर्ति में नहीं है कमी..
शहर की डिजाइन के हिसाब से देखा जाए तो प्रतिदिन 14 एमएलडी पानी की आवश्यकता है जबकि नहरी विभाग की ओर से प्रतिदिन 19 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। देखा जाए तो कमी व्यवस्था में है। नगर परिषद में जलदाय के एईए व जेईएन आदि कई पद रिक्त पड़े हैं। बार-बार मांग के बावजूद राज्य सरकार की ओर से रिक्त पदों को नहीं भरा गया है। नगर परिषद प्रशासन भी हाथ खड़े कर चुका है कि रिक्त पदों को नहीं भरने तक व्यस्थाएं सुधारना मुश्किल है।


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