नागौरी बैल "नारया" बना शुभंकर.जानिए जिला प्रशासन ने नारिया को ही क्यों चुना?
3 वर्ष से छोटे नागौरी बैलों को बाहर भेजने की पाबंदी के कारण अपनी पहचान खो रहे नागौरी बैल नारया को निर्वाचन विभाग ने इस बार शुभंकर के रूप में लॉन्च किया है। शनिवार को जिला परिषद सभागार में प्रशासन व पुलिस की संयुक्त बैठक में नागौर जिले का शुभंकर लॉच किया गया।
अनोखे रूप में पेश किए गए इस शुभंकर में नागौरी बेल नारया को साफा बनाया गया है। चेहरा हंसता हुआ रखा गया है। चारों पैरों में नागोरी मोजड़ी जूतियां पहनाई गई है यानी नारया को पूरी तरह ग्रामीण परिवेश में दर्शाया गया है। जिला निर्वाचन विभाग द्वारा लांच किए गए शुभंकर की प्रतिक्रिया स्वरूप प्रशंसा की गई है। शुभंकर की लॉन्चिंग के अवसर पर जिला परिषद व बाहर मेन रोड पर आकर्षक सजावट की गई। नारया का बड़ा पोस्टर लगाया गया।
मालूम हो कि नागौरी बैल पूरे देश में ही नहीं अखंड भारत यानि आजादी से पूर्व भारत का हिस्सा रहे पाकिस्तान तक प्रसिद्ध रहा है। बैल का नाम आते ही नागौरी बैल के रूप में ही याद किया जाता है। ऐसे में ताकत के रूप में नागौरी बैल प्रसिद्ध रहा है। नागौर में लगने वाले विभिन्न पशु मेला में सर्वाधिक नागौरी बैल ही बिकते थे।
पिछले कई वर्षों से 3 वर्ष से छोटे बैलों को राजस्थान से बाहर भेजने की पाबंदी ने इन बैलों के वजूद पर खतरा पैदा कर दिया है। किशोरावस्था वाले बैल को नारया कहते हैं जो स्वभाव से चंचल होता है।
जानिए इस बारे में जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव का क्या कहना है...
इलेक्शन में लोगों को प्रेरित करने के लिए शुभंकर पेश किया जाता है। लोगों को आकर्षित करने के लिए चुनावी एक्टिविटी के तहत शुभंकर बनाया गया है। जिस जिले की खासियत जिससे पहचान बनती है उसी के आधार पर नागौरी बैल नारया को शुभंकर बनाया गया है। इस शुभंकर से मतदान में भी लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा। नागौरी बैल से यहां के लोगों का जुड़ाव है। इस नारया के प्रति लोगों में अच्छी भावना वापस पैदा होगी।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें