नागौर में डांडिया गेर नृत्य की धूम लेकिन नृत्य में महिलाओं की नो एंट्री?
शीतला के अवसर पर शहर के अलावा चार अन्य जगहों पर भी डांडिया गेर नृत्य का आयोजन होगा। इस डांडिया गर में सबसे पुरानी व बड़ी गेर ताऊसर में आयोजित की जाएगी। माली समाज की इस डांडिया गेर में आसपास के गांव के अलावा नागौर शहर के लोगों का हुजूम उमङेगा।शहर सहित आसपास के गांवों में होली के बाद से यहां के पारंपरिक डांडिया गेर नृत्य की धूम मची हुई है। नवरात्र में गुजरात के डांडिया से बिल्कुल भिन्न है, नागौर का डांडिया गेर। पुरुष प्रधान इस डांडिया नृत्य में महिलाओं की नो एंट्री है । जबकि नवरात्रा के समय महिला व पुरूष मिलकर डांडिया करतें हैं। अलबत्ता महिलाओं की कमी नहीं खटकती है क्योंकि गेर में नृत्य करने वाले कई पुरुष महिलाओं का वेश धारण करते हैं।
होली के अवसर पर प्रतिवर्ष होने वाली डांडिया गेर नृत्य का पुरुषों में अभी भी भारी चार्म है। तैयारियां कई दिन पूर्व शुरू कर देते हैं। शहर में इस प्रकार की डांडिया की शुरुआत होली के दिन लोहियों के चौक से शुरू होती है। धुलंडी के दिन नया दरवाजा व बाठढ़िया का चौक में आयोजित की जाती है। इसके अलावा इस दिन निकटवर्ती ग्राम ताऊसर के दङा बास , ग्राम चेनार के बास जगावता , पांचोता,व पंवारा बास आदि में आयोजित होती है।
होली के आठ दिन बाद शीतलाष्टमी को सवेरे मानसर क्षेत्र के रामदेव जी मंदिर प्रांगण में डांडिया गेर का आयोजन होता है। शाम को नागौर से 3 किमी दूर ताऊसर की प्रसिद्ध डांडिया गेर होती है, जिसमें नागौर शहर के अलावा पुरा ताऊसर इकठ्ठा होता है। ताऊसर की इस गेर समारोह का आयोजन ताऊसर ग्राम पंचायत के सौजन्य से किया जाता है।
शीतलाष्टमी शाम को ही शहर के अजमेरी गेट के बाहर अचानक महादेव मंदिर में पारंपरिक गेर का भव्य आयोजन होगा जो देर रात तक चलेगा। डांडिया गेर को देखने के लिए लोगों के हुजूम उमड़ेगा। इसी कड़ी में शहर के पुराना बस स्टैंड पर डांडिया गैर का आयोजन स्थानीय व्यापारियों द्वारा किया जाएगा।
नागौर में 15 दिन तक होने वाले इस गैर नृत्य की खासियत यह होती है कि इसमें पुरुष पारंपरिक ठेट राजस्थानी वेशभूषा में नृत्य तो करते ही हैं साथ ही साथ अलग-अलग देवताओं व कई जने महिलाओं का वेश भी धारण कर डांडिया गेर नृत्य करते हैं।


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