नागौर में प्रधानमंत्री मोदी का सपना हो रहा है चूर चूर ?
शहर के वार्ड नंबर 22 के हालातों आजादी के बाद शायद सबसे बदतर है।
स्वच्छता का तमगा लेने के लिए इंदौर की तर्ज पर नागौर की सफाई की बात करते हैं वही वार्डों के प्रति भेदभाव की नीति पर काम कर रहे हैं।
देशभर में चलाए जा रहे स्वच्छ भारत मिशन के सपने को धूमिल करने का बिङा शायद नागौर ने उठा लिया है। जहां नगर परिषद कार्मिक सफाई के नाम पर मात्र खानापूर्ति कर रहे हैं वही सभ्य नागरिक कहलाने वाले कचरा फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कचरा संग्रहण वाहन मे कचरा डालना आज भी लगता है जैसे उनकी शान के खिलाफ काम हो रहा है। जब से घर घर से कचरा संग्रहण करने का काम टिप्पर चालकों को मिला है तब से वो भी सड़कों पर पड़े कचरे को उठाने में बोरियत महसूस करने लगे हैं। शहर के वार्ड नंबर 22 के हालातों आजादी के बाद शायद सबसे बदतर है। वार्ड के गांधी चौक से अजमेरी गेट रोड स्थित बस्सी मोहल्ले सरदार जी की पोल के पास वाले मुख्य रोड पर महीनों से कचरे का अंबार लगा है जिसकी तरफ नगर परिषद कार्मिक झांक कर भी नहीं देख रहे हैं। नगर परिषद प्रशासन एक तरफ तो स्वच्छता का तमगा लेने के लिए इंदौर की तर्ज पर नागौर की सफाई की बात करते हैं वही वार्डों के प्रति भेदभाव की नीति पर काम कर रहे हैं। इसका आरोप स्वयं वार्ड पार्षद मुजाहिद इस्लाम लगा रहे हैं। मुजाहिद का कहना है कि उनके वार्ड के प्रति भेदभाव किया जा रहा है उनके वार्ड में लगाया गया टिप्पर बार-बार और कहीं भेज दिया जाता है नालियां साफ करने वाले कर्मचारियों को भी नियमित वार्ड में नहीं भेज रहे हैं।


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