ड्राई फ्रूट्स के भाव आसमान में मगर अफगानिस्तान संकट की वजह से नहीं बढ़े हैं ड्राई फ्रूट्स के दाम, जानिए असली वजह
आप जानते हैं दुनिया का 83 फीसदी बादाम कैलिफोर्निया में पैदा होता है। सात फीसदी बादाम की पैदावार ऑस्ट्रेलिया में होती है। कैलिफोर्निया में क्रॉप ईयर 2021 का बादाम अगस्त में निकलना शुरू हो गया है। लेकिन वहां इस साल 11 फीसदी कम उत्पादन होने का अनुमान है।
अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र.. गुरुदेव सियाग सिद्ध योग जिससे होता है ऑटोमेटिक योग.. प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या खुद अनुभव करें..अपने यहां फेस्टिवल सीजन की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही दिल्ली और देश भर में सूखे मेवों (Dry Fruits) की कीमत में काफी इजाफा हो गया है। सब समझ रहे हैं कि अफगानिस्तान संकट (Afghanistan Crisis) की वजह से यहां ड्राई फ्रूट्स की कीमत बढ़ी है। लेकिन इसके पीछे बड़ी वजह ड्राई फ्रूट्स की कम पैदावार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कंटेनर्स की कमी को बताया जा रहा है।
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इंटरनेशल फ्रूट्स एंड नट्स ऑर्गनाइजेशन के ड्राई फ्रूट्स कंसल्टेंट रवींद्र मेहता के मुताबिक दुनिया का 83 फीसदी बादाम कैलिफोर्निया में पैदा होता है। सात फीसदी बादाम की पैदावार ऑस्ट्रेलिया में होती है। कैलिफोर्निया में क्रॉप ईयर 2021 का बादाम अगस्त में निकलना शुरू हो गया है। अभी हम जो बादाम खा रहे हैं, वह क्रॉप ईयर 2020 का है। उस साल वहां करीब 3.2 बिलियन पाउंड पैदावार हुई थी। क्रॉप ईयर 2021 में 2.8 बिलियन पाउंड बादाम निकलने का अनुमान है। यानी उत्पादन में करीब 11 फीसदी की कमी। बादाम का भाव बढ़ने का पहला कारण यही है।
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ड्राई फ्रूट्स की कीमत बढ़ने की दूसरी वजह है शिपिंग के लिए समय पर कंटेनर नहीं मिलना। रवींद्र मेहता का कहना है कि कोविड के दौर में अमेरिका ने अपने लोगों को राहत के नाम पर 2 से 3 ट्रिलियन डॉलर बांटे हैं। ऐसा इसलिए, ताकि मार्केट में डिमांड बनी रहे। इन पैसों से लोगों ने काफी सामान खरीदा, जिसकी सप्लाई चीन ने की। अभी काफी ऑर्डर क्रिसमस तक पूरे करने हैं। दुनिया भर के अधिकतर जहाज और कंटेनर इसी सप्लाई में लग गए हैं। शिपिंग कंपनियों के यहां से कई गुना अधिक मुनाफा कमाने को मिल रहा है। यही वजह है कि जुलाई में जो बादाम 600 रुपये किलो मिल रहा था, उसका रेट अब 1000 रुपये से ऊपर हो गया है।
तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। बताते हैं कि अभी तक अफगानिस्तान के तख्ता पलट से कोई दिक्कत महसूस नहीं हो रही है। वहां से अंजीर, पिस्ता पेशावरी, पिस्ता हैराती, किशमिश, मुनक्का, खुरमानी, काली द्राक्ष और करीब 12 तरह के बादाम हिन्दुस्तान आते हैं। इसमें पिस्ता हैराती और पेशावरी की पैदावार 30 फीसदी कम हुई है। जून में 1500 रुपये किलो पिस्ता था, तब पहली खबर कम पैदावार की आई। उस समय तालिबान इतना आगे बढ़ जाएगा, यह किसी को अनुमान नहीं था। अब 2100 रुपये पिस्ता हैराती और पेशावरी मिल रहा है।
ये ज्यादातर हलवाइयों के काम आता है। बाकी क्रॉप अंजीर, किशमिश, मुनक्का, खुरमानी और काली द्राक्ष की ठीक पैदावार है। इनके भाव में खास तेजी नहीं दिख रही। पिछले दिनों तालिबान के टेकओवर की वजह से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चमन का बॉर्डर बंद करना पड़ा, जो अब खुल चुका है। पिछले हफ्ते ही क्रॉप 2021 की अंजीर की गाड़ी भारत पहुंच चुकी है। उम्मीद है कि तालिबान व्यापार को नहीं रोकेगा। सभी को पैसों की जरूरत है। यदि चमन बॉर्डर बंद कर दिया, तब कुछ परेशानी आ सकती है।
अफगानिस्तान से भारत के बीच व्यापार सड़क और हवाई मार्ग से होता है, क्योंकि कोई समुद्री मार्ग नहीं है। अभी जो रेट बढ़े हैं, वह फसल की कम पैदावार की वजह बढ़े हैं। वैसे तालिबान और पाकिस्तान का पुराना रिश्ता रहा है, तो व्यापार बंद नहीं होगा। ऐसा लगता है। दुनिया में भारत को ड्राईफ्रूट्स सप्लाई करने में ईरान का तीसरा नंबर है। इससे भारत के रिश्ते काफी अच्छे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार आगे भी बेहतर ढंग से होता रहेगा। ईरान से पिस्ता डोडी, पिस्ता मगज, बादाम मामरा, बादाम कौमी, आलू बुखारा, अंजीर और 70 से 80 हजार टन खजूर आता है।
पिछले साल 1.90 हजार टन कच्चे पिस्ते डोडी की फसल थी, जो इस साल 1.45 हजार टन फसल होने का अनुमान है। यही वजह है कि जनवरी से मार्च 2021 में 600 से 625 रुपये किलो कच्चे डोडी का भाव अब 800 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह मगज का भाव 1350 रुपये किलो पहुंच गया है। ईरान से शिपिंग में कोई परेशानी नहीं है।
शिव शक्ति मोबाइल्स. मोबाइल सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर रिपेयरिंग. दिल्ली दरवाजा केे बाहर नागौर। आनंद पंवार- 9982252525दुनिया भर में काजू की सबसे अधिक खपत भारत में है। काजू टुकड़ों की 65 से 70 फीसदी खपत अपने देश में है। पिछले साल दीपावली पर काजू 4 टुकड़े का भाव 400 रुपये किलो था। ये भाव अब बढ़कर 650 रुपये तक हो गया है। इसका मुख्य कारण केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में लंबे समय तक लॉकडाउन लगना है। इन राज्यों में कोविड के केस अधिक रहे। लॉकडाउन होने की वजह से इन राज्यों में फैक्ट्रियां बंद रहीं।
इससे प्रॉडक्शन नहीं हो पाया। ड्राईफ्रूट्स के रेट बढ़ने से लोगों का फोकस मिठाइयों पर हो गया है। बादाम गिरी महंगी हो गई है, तो काजू की डिमांड बढ़ी है। मिठाइयों में काजू राजा है। मिठाइयों में सबसे अधिक काजू का इस्तेमाल होता है। ऐसे में उम्मीद है कि फेस्टिवल सीजन में इस साल ड्राई फ्रूट्स के बजाए मिठाइयां ज्यादा बिकेंगी। हमारे देश में करीब 3.25 लाख टन काजू खाया जाता है।











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