..और तुगलकी फरमान की वापसी.. जानिए क्या था नागौर के लिए फरमान?
नागौर। शहर को प्रेशर के साथ जलापूर्ति करने का नगर परिषद के पास कोई साधन नहीं था। इसके बावजूद जल आपूर्ति के समय बिजली कटौती करने का तुगलकी फरमान निकाला। इसके चलते आम लोगों सहित जनप्रतिनिधियों ने भी विरोध जताया। यह एकजुटता का ही परिणाम है कि शहरवासियों को 5 दिन परेशान करने का आदेश आखिरकार नगर परिषद को वापस लेना पड़ा है।
जल आपूर्ति के समय बिजली कटौती होने से आम नागरिकों सहित जनप्रतिनिधियों ने भी विरोध दर्ज कराया था। शहरवासियों का विरोध देखते हुए नगर परिषद आयुक्त ने सोमवार को एक पत्र जारी कर डिस्कॉम सहायक अभियंता से बिजली कटौती करने का आदेश निरस्त करने को कहा है। पत्र में लिखा कि गत 31 मई को 8 जुलाई को बिजली कटौती करने का जो आदेश दिया जिसके कारण आम नागरिकों और वार्ड पार्षदों आदेश को वापस लेने को कहा है।
गौरतलब है कि गत 8 जुलाई को नगर परिषद की ओर से एक स्मरण पत्र जारी कर जल आपूर्ति के समय बिजली कटौती करने को कहा गया था। कृत्रिम जल संकट के दौर से गुजर रहे शहर के लोगों ने इस फरमान पर बारी आक्रोश बताया था। लोग इसको तुगलकी फरमान बताते हुए मनमर्जी करने का आरोप लगाया। डिस्कॉम ने भी नगर परिषद के आदेश पर शहर में यह व्यवस्था शुरू कर दी।
अव्यवस्थित रूप से ही रही। लोगों ने लगाया कि नगर परिषद प्रशासन ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए यह आदेश जारी किए हैं। क्योंकि बिना बूस्टर के शहर के किसी भी हिस्से में प्रेशर के साथ जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। जलदाय विभाग ने भी आज तक शहर को प्रेशर के साथ जलापूर्ति देने की कोई व्यवस्था नहीं कर रखी है।


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