आश्चर्यजनक किंतु सत्य है कि नागौर जिले के 163 गांव ऐसे, जिनमें कोरोना संक्रमण का एक भी केस रिपोर्ट नहीं.. इसी की बदौलत माॅडल बनने को अग्रसर नागौर का कोविड हैल्थ मैनेजमेंट..
साथ ही जिले की 171 ग्राम पंचायतें ऐसी, जहां वर्तमान में एक भी कोरोना एक्टिव केस नहीं
नागौर, राजस्थान के मध्य भाग में स्थित लंबे- चौड़े भूभाग व राज्य के आधा दर्जन जिलों से लगती सीमाओं वाला जिला, जनमानस में यहां की एक बड़ी तादात दक्षिणी भारत के कई राज्यों में रहती हैं। कोरोना के संक्रमण का दूसरा दौर आया, बड़ी संख्या में कोविड-19 पाॅजिटिव मरीज पाए गए लेकिन टीम हैल्थ नागौर ने इसका डटकर मुकाबला किया।
जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा मिशन अगेंस्ट कोरोना, पूरे राज्य में माॅडल बनने की ओर से अग्रसर है। सरकारी अस्पतालों में आॅक्सीजन का तंत्र विकसित करने के लिए आॅपरेशन प्राणवायु, कोविड डेडिकेटेड हाॅस्पिटल, कोविड केयर कंसलटेंसी सेंटर, कोविड केयर सेंटर, आॅक्सीजन कंसंट्रेटर से लेकर कोविड पाॅजिटिव मरीजों को जीवनरक्षक इंजेक्शन व दवाईयों तक में किसी भी तरह की कमी नहीं आने का सफलतम प्रयास टीम नागौर ने किया। कोविड डेडिकेटेड हाॅस्पिटलों व कोविड केयर सेंटर्स पर भर्ती कोरोना पाॅजिटिव मरीजों से आॅनलाइन संवाद और उनकी राउण्ड द क्लाॅक केयर टेकिंग व्यवस्था, कोरोना सैम्पलिंग, रेपिड एंटीजन टेस्ट से लेकर कोविड वैक्सीनेशन तक में नागौर के कोविड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम एक नजीर बनकर उभरा है।
राज्य सरकार के जन अनुशासन पखवाड़ा व लाॅकडाउन नियमों की पालना करवाने, मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी, मेरा वार्ड-मेरी जिम्मेदारी अभियान के तहत घर-घर हैल्थ स्क्रीनिंग व मेडिसिन किट वितरण के काम को युद्ध स्तर पर चलाते हुए टीम हैल्थ नागौर जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी के नेतृत्व में प्रशासन एवं पुलिस की सहायता से कोरोना के नए स्ट्रेन के संक्रमण की चैन को तोड़ने का प्रयास किया है।
वहीं दूसरी जिले में कुपोषित बच्चों व एनीमिक किशोरी बालिकाओं को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए जिले में एक अभिनव अभियान ‘‘लाडेसर‘‘ गत 27 मई को जिला कलक्टर के मार्गदर्शन में शुरू किया गया है। अभियान लाडेसर के तहत तीन दिनों में करीब 60 हजार बच्चों की हैल्थ स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से 900 बच्चे कुपोषित व 24 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं। इन कुपोषित बच्चों को लाडेसर पोषक किट का वितरण शुरू किया जा चुका हैं। वहीं अभियान के तहत पूर्व में चिन्हित की गई जिले की 930 एनीमिक किशोरी बालिकाओं को आयरन फोलिक एसिड व मल्टीविटामिन मेडिसिन किट वितरित किए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ अभियान के दौरान नई एनीमिक किशोरी बालिकाओं की हैल्थ स्क्रीनिंग के जरिए पहचान की जा रही है।
जिला कलक्टर व टीम हैल्थ नागौर ने जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों व स्वयंसेवी संगठनों की मदद से इस अभियान में आमजन को कोरोना से बचाव के प्रति जागरूकता लाने के काम में एक हद तक सफलता भी हासिल की है। इसी तरह का नतीजा है कि आज नागौर जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां एक भी कोरोना एक्टिव केस नहीं बचा है तो कई गांव ऐसे हैं जहां का कोई भी नागरिक कोरोना से संक्रमित ही नहीं हुआ। इसके पीछे का कारण उन गांवों क आमजन की नो माॅस्क नो मुवमेंट, दो गज की दुरी और सेनेटाइजेशन के प्रति जागरूकता रखना भी रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. मेहराम महिया ने बताया कि जिले में 171 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनमें वर्तमान में एक भी कोरोना एक्टिव केस नहीं है। वहीं जिले में 163 गांव ऐसे हैं, जहां कोरोना संक्रमण के दूसरे दौर में एक भी कोविड पाॅजिटिव मरीज नहीं पाया गया।
उखड़ती सांसों को थामने के लिए 504 आॅक्सीजन कंसट्रेटर
जिला मुख्यालय सहित उपखण्ड मुख्यालयों पर राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए आॅक्सीजन कंसंट्रेटर्स के अलावा जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार के प्रयासों से भामाशाहों व समाजसेवियों तथा निजी क्षेत्र की कंपनीज ने भी गंभीर कोविड मरीजों की उखड़ती सांसों को थामने के लिए बड़ी संख्या में आॅक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया करवाए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ मेहराम महिया ने बताया कि वर्तमान में कुल 504 आॅक्सीजन कंसट्रेटर चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध करवा दिए गए हैं।


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