साल में अप्रैल-मई ऐसे जिसमें सर्राफा और इलेक्ट्रॉनिक का होता है 50% काराेबार, जो लॉक डाउन से हो गया है प्रभावित, आगे जून से सितंबर ऑफ सीजन, यही सोच कर व्यापारी हो रहे परेशान
प्रहार: इन्हीं दो महीनों में शादियों की खरीदी, फसल की आवक और ज्वेलरी का होता है अधिक उठाव
नागाैर, प्राइमो पोस्ट रिपोर्टर। कारोबार के हिसाब से पूरे साल में अप्रैल यह 2 महीने ऐसे होते हैं जब सराफा और इलेक्ट्रॉनिक का 50% व्यापार हो जाता है। क्योंकि यही वह समय है जब अधिकांश शादियों के मुहूर्त होते हैं। उपज की आवक का भी यही समय होता है। शादियों के लिए खरीद-फरोख्त और ज्वेलरी का भी अधिक उठा इन दो महीनों में होता है। जून से सितंबर तक का समय व्यापारियों के लिए ऑफ सीजन होता है। इधर काेराेना संक्रमण के चलते बाजार 1 महीने से पूरी तरह से बंद है। कर सलाहकारों की माने तो बाजार में गति आने में अभी 6 से 8 महीने का समय और लग सकता है। ऐसे में व्यापारी मानकर चल रहा है कि अब देवउठनी ग्यारस से व्यापार में उठाव आने की उम्मीद हो सकेगी।
जिले का नागौर, मकराना, नावां ऐसा है जहां लोगों की आजीविका उद्योगों के भरोसे है। बाजार खुलने के बाद भी उद्योगों में प्रोडक्शन कम होगा जिससे कंपनियों को आर्थिक नुकसान होगा। औद्योगिक क्षेत्र होने से यहां सबसे ज्यादा बाहरी मजदूर हैं। ऐसे में नुकसान के चलते उद्योग छंटनी करने का निर्णय लेता है तो इससे लोगों का पलायन बढ़ेगा।
व्यापारिक गति धीमी पड़ेगी-
कर सलाहकार दिलशाद इकबाल का कहना है कि कोरोना से लड़ रहे लोगों को अर्थव्यवस्था से भी जूझना होगा। लॉक डाउन के चलते जिले की अर्थव्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा गई है। महीनाें पीछे चली गई है जिसे व्यवस्थित होने में 6 से 8 महीने लग सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक बंद का असर प्राइवेट कंपनियों के साथ इलेक्ट्रॉनिक, सराफा, होटल, रेस्टोरेंट पर ज्यादा पड़ेगा लाॅक डाउन खुलने के बाद नौकरियों पर असर पड़ेगा जिससे व्यापारिक गति धीमी पड़ सकती है। लॉकडाउन खुलने पर व्यक्ति खर्चा कम करने की सोचेगा इससे मुद्रा चलन में कमी आएगी।
गर्मी के सीजन के आइटम पड़े रहने की सता रही है चिंता-
गर्मी का सीजन ऐसे ही गुजर गया इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारियाें का माल गोदाम में हीं रह गया। कुल मिलाकर यह सीजन व्यापारियाें के लिए नुकसानदेह है। कर सलाहकाराें का दावा है कि दिवाली पर भी करीब 40 प्रतिशत ही व्यापार रह सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारियों ने यह बात स्वीकारी है कि लॉक डाउन खुलते ही मानसून आ जाएगा जिससे व्यापार नहीं के बराबर होगा। लाॅकडाउन खुलने के बाद भी लोगों में संक्रमण का डर तो रहेगा ही इसलिए व्यापार बहुत कम हाेगा। तय है कि बाजार खुलने के बाद भी व्यापार पर असर पड़ेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी राजेंद्र पिती ने बताया कि गमी का सीजन कूलर, एसी और फ्रीज का है, अभी नहीं बेचेंंगे तो पड़ा रह जाएगा। लोग डिजिटल पेमेंट करने को तैयार है और हम भी गोदाम से भेज सकते हैं। जरूरत सरकार की ओर से पास जारी करने की है।
सर्राफा व्यापार दिवाली तक ही उभरेगा-
जिले में करीब 800 ज्वेलरी शॉप है। वही सैकड़ों ज्वेलर ऐसे है जो घरों से ज्वेलरी का काम करते हैं। वर्तमान समय शादियों में मंडी में फसल आने का है इस समय बाजार में भरपूर पैसा रहता है। छोटे व्यापारियों का करीब 50 प्रतिशत व्यापार इन 2 महीनों में होता है मगर कोरोनावायरस की वजह से पिछले 1 माह से बाजार बंद पड़े हैं। सर्राफा व्यवसायी पवन डांवर ने बताया कि लगभग शादियां भी निरस्त हो चुकी है, इससे व्यापार पर काफी असर पड़ा है एवं खुलने के बाद में व्यापार चलना मुश्किल है। क्योंकि आभूषण केवल सीजन में ही खरीदे जाते हैं जून से सितंबर तक ऑफ सीजन रहेगा दिवाली में व्यापार की संभावना है। व्यापार की वापसी ताे देवउठनी ग्यारस तक आएगी क्योंकि आखातीज के बाद केवल यही सीजन ऐसा है जिसमें सबसे ज्यादा शादियां होती हैं।


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