PrimoPost - Latest News Articles Information India

Latest Information Articles Culture Politics Daily News Government Global Activities Covid-19 Guidlines

Breaking

बुधवार, 25 मार्च 2026

धुरंधर 2 ने पाकिस्तान में मचा दी हलचल, अब भिखारियों में ढूंढे जा रहे 'भारतीय जासूस'

धुरंधर 2 ने पाकिस्तान में मचा दी हलचल, अब भिखारियों में ढूंढे जा रहे 'भारतीय जासूस'



कभी-कभी एक फिल्म सिर्फ पर्दे पर नहीं चलती, बल्कि सीमा पार तक हलचल मचा देती है। निर्माता-निर्देशक आदित्य धर की नई फिल्म “धुरंधर 2” के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। भारत में यह फिल्म सिनेमाघरों में चल रही है, लेकिन इसकी गूंज पाकिस्तान की गलियों तक सुनाई दे रही है। फिल्म रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर एक अजीब किस्म की खबरें घूमने लगीं.. पाकिस्तान के कुछ इलाकों में भिखारियों को पकड़कर पूछताछ की जा रही है कि कहीं वे भारतीय जासूस तो नहीं! यह सुनने में भले ही फिल्मी लगे, लेकिन वहां की मीडिया और सोशल मीडिया चर्चाओं में यह बात बार-बार सामने आ रही है। कह सकते हैं कि धुरंधर 2 ने पाकिस्तान में एक नई बहस छेड़ दी है.. कहीं हर परछाईं में भारतीय जासूस तो नहीं छिपा?




आखिर फिल्म में ऐसा क्या है?

आदित्य धर की फिल्मों की पहचान ही यही है कि वे देश की सुरक्षा, खुफिया ऑपरेशन और आतंकवाद जैसे विषयों को सीधे तरीके से पर्दे पर लाते हैं। “धुरंधर 2” भी उसी शैली की फिल्म है। कहानी भारतीय खुफिया एजेंसियों के उन ऑपरेशनों के इर्द-गिर्द घूमती है जो सीमा पार से संचालित आतंकवादी नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश करते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह आतंकवाद सिर्फ बंदूक से नहीं चलता, बल्कि उसके पीछे एक पूरा सिस्टम होता है। फंडिंग, ट्रेनिंग और राजनीतिक संरक्षण का। यही वह बात है जो फिल्म को सिर्फ एक्शन थ्रिलर नहीं रहने देती, बल्कि एक राजनीतिक बयान में बदल देती है।



पाकिस्तान में बेचैनी क्यों?

फिल्म में दिखाए गए कुछ दृश्य और संवाद पाकिस्तान में चर्चा का कारण बन गए हैं। कई विश्लेषकों का कहना है कि फिल्म ने जिस तरह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर चोट की है, उसने वहां के कुछ हलकों को असहज कर दिया है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कहीं लोग इसे भारत का “साइकोलॉजिकल वारफेयर” बता रहे हैं, तो कहीं मजाक उड़ाते हुए कहा जा रहा है कि अब हर भिखारी में जासूस नजर आ रहा है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि जब कोई फिल्म किसी देश की संवेदनशील नस पर हाथ रखती है, तो प्रतिक्रिया होना तय है।



भारत में भी कम नहीं है बहस

दिलचस्प यह है कि भारत में भी फिल्म को लेकर राय एक जैसी नहीं है। एक वर्ग इसे साहसिक फिल्म मान रहा है, जो आतंकवाद की जड़ों पर सीधी चोट करती है। उनका कहना है कि अगर आतंकवाद एक वास्तविक समस्या है तो उसे दिखाना भी जरूरी है।दूसरी ओर कुछ लोग इसे प्रोपेगेंडा सिनेमा कह रहे हैं। उनका आरोप है कि फिल्म एक खास राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत करती है और एक वर्ग की छवि खराब करती है। लेकिन फिल्म के समर्थकों का जवाब भी उतना ही सीधा है.. अगर कहानी सच के करीब है तो उसे दिखाने में हिचक क्यों?



बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की जिज्ञासा

विवादों के बावजूद फिल्म ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। सिनेमाघरों में भीड़ और सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा यह बता रही है कि धुरंधर 2 ने लोगों को आकर्षित जरूर किया है। कई समीक्षकों ने फिल्म के निर्देशन, बैकग्राउंड स्कोर और एक्शन सीक्वेंस की तारीफ की है। वहीं कुछ आलोचकों का कहना है कि फिल्म कई जगह बहुत आक्रामक हो जाती है। लेकिन शायद यही उसकी ताकत भी है.. वह दर्शकों को तटस्थ रहने का मौका नहीं देती।



सिनेमा की ताकत

इतिहास गवाह है कि कई बार फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म देती हैं। धुरंधर भी शायद उसी श्रेणी में आ गई है। एक तरफ भारत में लोग इसे देशभक्ति और साहस की कहानी मान रहे हैं, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान में यह बेचैनी का कारण बन गई है। और जब किसी फिल्म पर इतनी प्रतिक्रियाएँ आने लगें, तो समझिए कि उसने कहीं न कहीं असर जरूर किया है।



सवाल यह नहीं है कि धुरंधर 2 सही है या गलत। असली सवाल यह है कि उसने जिस मुद्दे को उठाया है, वह कितना वास्तविक है। अगर एक फिल्म के बाद किसी देश में भिखारियों तक में जासूस ढूंढे जाने लगें, तो यह बताने के लिए काफी है कि सिनेमा कभी-कभी बंदूक से भी ज्यादा असरदार साबित हो सकता है। जय हिंद..

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें